ममता की मजबूत नींव: गर्भ से बचपन तक हर नन्हीं जिंदगी को मिलेगा बेहतर पोषण, आंगनबाड़ी केंद्र होंगे और सशक्त
कानपुर नगर।
जनपद के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को शासन की मंशा के अनुरूप सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और नौनिहालों को बेहतर पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। शुक्रवार को सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिला कन्वर्जेंस प्लान समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने संभव अभियान 6.0 के प्रभावी संचालन और आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत बनाने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, स्वास्थ्य तथा पंचायती राज विभाग आपसी समन्वय से अभियान को सफल बनाएं। गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान कर उनका स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार सुनिश्चित किया जाए। चिकित्सकीय जटिलता वाले गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराने के साथ डिस्चार्ज के बाद नियमित फॉलोअप और गृह भ्रमण भी किया जाए।
उन्होंने छह माह से कम आयु के शिशुओं की विशेष निगरानी के निर्देश देते हुए कहा कि "छह माह–सात बार" रणनीति के तहत नियमित वजन मापन, एमसीपी कार्ड पर अंकन तथा पोषण और वृद्धि का आकलन किया जाए। जन्म के समय कम वजन वाले नवजातों की भी लगातार निगरानी रखी जाए। सभी गंभीर कुपोषित बच्चों को ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर स्वास्थ्य जांच के लिए लाया जाए तथा उनका ई-कवच पर पंजीकरण कराया जाए।
डीएम ने गर्भवती एवं धात्री महिलाओं का पोषण ट्रैकर पर शत-प्रतिशत पंजीकरण, गर्भावस्था के दौरान वजन वृद्धि की निगरानी, टेक होम राशन वितरण और पोषण परामर्श सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत सभी पात्र महिलाओं का पंजीकरण कराने पर भी जोर दिया।
उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के उन्मुखीकरण, सेक्टर स्तरीय मासिक बैठकों में अभियान की नियमित समीक्षा तथा पुनः वजन सप्ताह आयोजित कर बच्चों की पोषण स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए। ब्लॉक एवं जनपद स्तरीय पोषण समिति की बैठकों में भी अभियान की नियमित समीक्षा और प्रभावी अनुश्रवण सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में बताया गया कि संभव अभियान 6.0 का संचालन 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। इस वर्ष अभियान की थीम "गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा" रखी गई है। अभियान के तहत गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ गंभीर (सैम) एवं मध्यम (मैम) कुपोषण की रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी, परियोजना निदेशक आलोक कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) प्रीति सिन्हा, जिला विकास अधिकारी आत्मप्रकाश रस्तोगी, जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।