उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लगातार दूसरे दिन बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। राजधानी सहित आसपास के क्षेत्रों में पिछले 48 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, लखनऊ में पिछले दो दिनों में 150 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। नगर निगम की टीमें जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं, लेकिन बारिश की तीव्रता के कारण राहत कार्यों में कठिनाई आ रही है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है, जिसमें अगले 48 घंटों तक भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। विशेष रूप से पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। राहत और बचाव कार्यों के लिए एन डी आर एफ और राज्य आपदा प्रबंधन बल की टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। वाराणसी में गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण घाट किनारे स्थित लगभग 100 छोटे मंदिर जलमग्न हो गए हैं। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे शहर के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में जलस्तर में अचानक वृद्धि हुई, जिससे निचले इलाकों में स्थित मंदिरों और घरों में पानी भर गया है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नावों की व्यवस्था की है और राहत शिविर स्थापित किए हैं। उत्तर प्रदेश में कुल 11 नदियां उफान पर हैं, जिनमें गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती और रामगंगा प्रमुख हैं। इन नदियों के जलस्तर में वृद्धि ने कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। विशेष रूप से पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में स्थिति गंभीर है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई नदियों का जलस्तर पिछले 10 वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ रहा है। जल संसाधन विभाग ने नदियों के किनारे बसे गांवों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। बारिश के कारण कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है। किसानों की खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है और मुआवजे के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में जलभराव के कारण बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई है और कई क्षेत्रों में बिजली कटौती की जा रही है। नगर निगम के अनुसार, जलभराव वाले क्षेत्रों में बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थिति की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान की जाए और राहत कार्यों में तेजी लाई जाए। मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया और अधिकारियों को स्थिति पर निरंतर नजर रखने को कहा। केंद्र सरकार ने भी उत्तर प्रदेश को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एन डी आर एफ) की अतिरिक्त टीमों को राज्य में तैनात किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और लोगों से सहयोग की अपील की है। स्थिति पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है। राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने आपातकालीन कोष से 50 करोड़ रुपये जारी किए हैं। अंतिम अपडेट के अनुसार, लखनऊ में बारिश का सिलसिला जारी है, हालांकि तीव्रता कम हुई है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है, लेकिन जलस्तर में धीमी गति से गिरावट देखी जा रही है। 75 जिलों में अलर्ट जारी है और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। मौसम विभाग अगले 48 घंटों के लिए भी अलर्ट जारी कर चुका है, जिससे लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। यह बारिश पिछले कई वर्षों में उत्तर प्रदेश में हुई सबसे भारी बारिश में से एक है।