रायबरेली के एक स्कूल गेट पर लावारिस बच्चों की किताबों का ढेर लगा देख एक स्थानीय निवासी द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल किया गया एक वीडियो अब चर्चा का विषय बन गया है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि स्कूल के बाहर किताबों का एक बड़ा ढेर लगा है, जो संभवतः छात्रों की हैं, और उन्हें किसी ने भी ध्यान नहीं दिया है। इस वीडियो के वायरल होते ही लोगों में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतने सारे किताबें स्कूल के बाहर कैसे जमा हो गईं और उन्हें वापस करने की कोई व्यवस्था क्यों नहीं की गई। यह घटना जिले में शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी की ओर भी इशारा करती है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के तेजी से फैलने से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। लोगों ने इस पर अपनी चिंता व्यक्त की है और मांग की है कि इन किताबों के असली हकदारों की पहचान की जाए और उन्हें वापस दिलाया जाए। इस मामले में संज्ञान लेते हुए, बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने तत्काल संज्ञान लिया है। वीडियो की सामग्री और जनता की प्रतिक्रिया को देखते हुए, अधिकारी ने संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य और शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। बीएसए के आदेश के अनुसार, स्कूल प्रबंधन को यह निर्देश दिया गया है कि वे इन किताबों की पहचान करें और उन्हें किसी भी छात्र को वापस करने की प्रक्रिया शुरू करें। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि ऐसी घटना दोबारा न हो। अधिकारी ने यह भी कहा है कि जो किताबें छात्रों की नहीं हैं, उन्हें उचित माध्यमों से redistribution के लिए भेजा जाए, ताकि वे किसी काम आ सकें। यह कदम छात्रों के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह घटना एक चेतावनी है कि स्कूल के बाहर छोड़ी गई कोई भी वस्तु, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, उसकी जिम्मेदारी स्कूल और प्रशासन की होती है। बीएसए के इस आदेश के बाद, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि स्कूल प्रबंधन इस मामले में क्या कदम उठाता है। यह घटना शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और जागरूकता की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
रायबरेली में स्कूल गेट पर मिलीं लावारिस किताबें, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर बीएसए की कार्रवाई

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