रायबरेली के कीरतपुर चरूहार क्षेत्र में पिछले 15 दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस लंबे समय से जारी बिजली कटौती का मुख्य कारण विभाग की निष्क्रियता है, क्योंकि जले हुए ट्रांसफार्मर को अभी तक बदला नहीं गया है। इस लापरवाही के कारण सैकड़ों घरों की बिजली गुल है, जिससे लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और कृषि कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग के अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। बिजली गुल होने से सैकड़ों परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। घरों में न तो रोशनी है, न ही पंखे चल रहे हैं, जिससे गर्मी के मौसम में लोगों को अत्यधिक परेशानी हो रही है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह बाधित हो गई है, क्योंकि अंधेरे में उन्हें पढ़ने में कठिनाई हो रही है। महिलाओं को घरेलू काम करने में भी समस्या आ रही है, और फ्रिज न चलने के कारण खाने-पीने की चीजें खराब हो रही हैं। बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि गर्मी और उमस के कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। लोगों का कहना है कि 15 दिनों से बिजली न होने के कारण उनका जीना मुश्किल हो गया है। कृषि क्षेत्र पर भी इस बिजली संकट का गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। नलकूपों के संचालन के लिए बिजली न होने के कारण किसानों को सिंचाई में भारी कठिनाई हो रही है। धान और अन्य फसलों की सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन बिजली न होने से किसान खेतों में पानी नहीं डाल पा रहे हैं। इससे फसलों के बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा। किसानों का कहना है कि यदि समय पर सिंचाई नहीं हुई, तो उनकी पूरी मेहनत बेकार हो जाएगी और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। यह स्थिति न केवल किसानों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट है। इस लंबे समय से जारी बिजली कटौती का मुख्य कारण विभाग की निष्क्रियता है। जले हुए ट्रांसफार्मर को बदलने के लिए विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग के अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है। ट्रांसफार्मर बदलने के लिए कोई समय-सीमा भी तय नहीं की गई है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि विभाग की इस लापरवाही के कारण उन्हें 15 दिनों से अंधेरे में रहना पड़ रहा है। विभाग की इस विफलता ने लोगों का विश्वास विभाग से पूरी तरह खत्म कर दिया है। बिजली की अनुपलब्धता ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी पंगु बना दिया है। छोटी दुकानें, रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे उद्योग पूरी तरह प्रभावित हैं, क्योंकि वे बिजली के बिना अपना काम नहीं कर पा रहे हैं। मोबाइल चार्जिंग, कंप्यूटर चलाने और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग में भी समस्या आ रही है। इससे लोगों की कमाई पर भी असर पड़ रहा है। इसके अलावा, बिजली न होने के कारण लोगों को पानी की भी समस्या हो रही है, क्योंकि कई क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति के लिए भी बिजली की आवश्यकता होती है। यह स्थिति लोगों के लिए दोहरी मार साबित हो रही है। कीरतपुर चरूहार में 15 दिनों से जारी यह बिजली संकट अब एक गंभीर समस्या बन चुका है। जले हुए ट्रांसफार्मर को न बदलना और बिजली आपूर्ति बहाल न करना विभाग की बड़ी विफलता है। सैकड़ों घरों और नलकूपों पर पड़ने वाले इस असर ने लोगों का जीवन और कृषि कार्य दोनों ही ठप कर दिए हैं। अब लोगों को उम्मीद है कि विभाग जल्द से जल्द कार्रवाई करते हुए ट्रांसफार्मर बदलकर बिजली बहाल करेगा, ताकि लोगों को इस संकट से राहत मिल सके। जब तक विभाग की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया जाता, तब तक लोगों की यह परेशानी बनी रहेगी।