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कमिश्नरेट पुलिस व जिला पुलिस में क्या अंतर है?

टीम पुलिस प्रहरी सूर्या 12 फ़रवरी 2026

कमिश्नरेट पुलिस व जिला पुलिस में क्या अंतर है?

कमिश्नरेट पुलिस और साधारण (जिला) पुलिस व्यवस्था में मुख्य अंतर प्रशासनिक ढांचे और अधिकारों को लेकर होता हैl
कमिश्नरेट पुलिस व्यवस्था बड़े शहरों में लागू की जाती है। इस व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर (आमतौर पर आईजी या एडीजी रैंक के अधिकारी) के पास कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ कई मजिस्ट्रेटी अधिकार भी होते हैं। यानी धारा 144 लागू करना, लाइसेंस जारी करना, हथियार लाइसेंस रद्द करना, धरना-प्रदर्शन की अनुमति देना जैसे अधिकार सीधे पुलिस कमिश्नर के पास होते हैं। इसमें निर्णय तेजी से लिए जाते हैं और प्रशासनिक प्रक्रिया कम होती है।
वहीं साधारण (जिला) पुलिस व्यवस्था में पुलिस अधीक्षक (एसपी) कानून-व्यवस्था संभालते हैं, लेकिन मजिस्ट्रेटी अधिकार जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के पास होते हैं। यानी धारा 144 लगाने, लाइसेंस जारी करने या बड़े प्रशासनिक फैसलों के लिए पुलिस को जिला प्रशासन पर निर्भर रहना पड़ता है। इसमें निर्णय प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है।
संक्षेप में अंतर इस प्रकार है —
कमिश्नरेट में पुलिस के पास मजिस्ट्रेटी अधिकार होते हैं, जबकि साधारण पुलिस में ये अधिकार डीएम के पास होते हैं।
कमिश्नरेट व्यवस्था बड़े और महानगरों में लागू होती है, साधारण व्यवस्था अधिकतर जिलों में।
कमिश्नरेट में निर्णय तेजी से लिए जाते हैं, साधारण व्यवस्था में प्रशासनिक समन्वय अधिक होता है।
कमिश्नरेट का प्रमुख पुलिस कमिश्नर होता है, जबकि साधारण व्यवस्था में एसपी और डीएम दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
इस प्रकार कमिश्नरेट प्रणाली को अधिक शक्तिशाली और त्वरित निर्णय वाली व्यवस्था माना जाता है, जबकि साधारण पुलिस व्यवस्था पारंपरिक जिला प्रशासन मॉडल पर आधारित होती है।