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बोरी संकट से धीमी पड़ी गेहूं की खरीद, लक्ष्य पर असर की आशंका

बोरी संकट से धीमी पड़ी गेहूं की खरीद, लक्ष्य पर असर की आशंका

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद इस बार बोरी की भारी कमी के कारण सुस्त रफ्तार से चल रही है। 30 मार्च से शुरू हुई खरीद के 19 दिनों में अब तक केवल 1,89,794 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा सका है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 3,42,879 मीट्रिक टन था।

अधिकारियों के अनुसार, खरीद के लिए करीब दो लाख गांठ बोरों की जरूरत थी, लेकिन समय पर इंडेंट न भेजे जाने से आपूर्ति नहीं हो सकी। पीपी बैग (प्लास्टिक बोरे) के विकल्प पर भी युद्ध जैसी परिस्थितियों के चलते कंपनियों ने आपूर्ति से इंकार कर दिया। इसके बाद पुराने बोरों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे और देरी हो गई।

स्थिति बिगड़ने पर अब कोटेदारों से बोरे जुटाकर काम चलाया जा रहा है। कई माध्यमों से बोरों की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन खरीद अभी भी पूरी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है।

इस वर्ष 50 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है, जो 15 जून तक चलेगा। किसानों से ₹2585 प्रति कुंतल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की जा रही है। वहीं, फॉर्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य करने के हालिया फैसले से भी प्रक्रिया की गति प्रभावित हुई है।

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