उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य और पोषण तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि की संभावना पर विचार किया है। यह निर्णय, जो राज्य के अनुपूरक बजट में घोषित किए जाने की संभावना है, उन हजारों कर्मियों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है जो जमीनी स्तर पर सरकार की योजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस कदम से न केवल इन कार्यकर्ताओं की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा, बल्कि उनके मनोबल और कार्यक्षमता में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं की आधारशिला हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत कार्य करते हैं, जो बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा पर केंद्रित है। वे छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पूरक पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच जैसी आवश्यक सेवाएं प्रदान करते हैं। वहीं, आशा कार्यकर्ता राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्य करते हुए समुदाय और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करती हैं। वे मातृ स्वास्थ्य, शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और संक्रामक रोगों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन दोनों श्रेणियों के कर्मी अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हैं, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में। इन कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि की मांग लंबे समय से की जा रही है। वर्तमान मानदेय, जो उनके आजीविका का प्राथमिक स्रोत है, अक्सर बढ़ती जीवन लागत और उनके कार्य की कठिन प्रकृति के अनुरूप नहीं माना जाता है। इन कर्मियों का योगदान, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान, अत्यंत सराहनीय रहा है, जब उन्होंने घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने, टीकाकरण अभियान चलाने और जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसलिए, मानदेय में वृद्धि को उनके कठिन परिश्रम और समर्पण की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगा और उनके मनोबल को बढ़ाएगा, जिससे वे और अधिक उत्साह के साथ अपने कर्तव्यों का पालन कर सकेंगे। अनुपूरक बजट का उपयोग इस घोषणा के लिए एक संभावित माध्यम के रूप में किया जा रहा है। अनुपूरक बजट, जिसे अतिरिक्त अनुदान या पूरक बजट के रूप में भी जाना जाता है, वित्तीय वर्ष के दौरान सरकार द्वारा प्रस्तुत किया जाता है जब अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। यह नई योजनाओं, मौजूदा योजनाओं में बढ़ी हुई लागत, या सरकार द्वारा किए गए नए वादों को पूरा करने के लिए हो सकता है। इस मामले में, अनुपूरक बजट में मानदेय वृद्धि की घोषणा सरकार की प्राथमिकता को दर्शाती है। यह संकेत देता है कि सरकार इन कार्यकर्ताओं के कल्याण को एक महत्वपूर्ण क्षेत्र मानती है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। इस संभावित वृद्धि का प्रभाव केवल इन कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य और पोषण पारिस्थितिकी तंत्र तक विस्तारित होगा। बेहतर वित्तीय स्थिति के साथ, कार्यकर्ता अपनी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने में सक्षम होंगे। इससे लाभार्थियों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार हो सकता है। यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल कायम कर सकता है, जिससे देश भर में इसी तरह के कदम उठाए जा सकते हैं। यह सरकार की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है जिसमें वह अपने सबसे महत्वपूर्ण अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के कल्याण को प्राथमिकता देती है। वर्तमान में, इस घोषणा की प्रतीक्षा पूरे राज्य में इन कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों द्वारा की जा रही है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संभावना प्रबल है कि अनुपूरक बजट में इस पर घोषणा की जाएगी। यह कदम सरकार और इन कार्यकर्ताओं के बीच एक सकारात्मक संबंध स्थापित करेगा, जो सरकार के प्रति उनकी निष्ठा और प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा। यह देखना बाकी है कि सरकार इस घोषणा को किस रूप में प्रस्तुत करती है और इस कदम के कार्यान्वयन के लिए क्या समय सीमा निर्धारित की जाती है। हालांकि, यह कदम निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा।
योगी सरकार द्वारा आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि की संभावना, अनुपूरक बजट में घोषणा की संभावना

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