अभिनेता सनी देओल ने हाल ही में 1947 के भारत विभाजन के दौरान परिवारों पर पड़े गहरे प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि विभाजन के समय परिवार टूटकर बिखर गए थे, लेकिन फिर भी उन्होंने किसी तरह खुद को संभाला। देओल ने कहा कि इस त्रासदी और संघर्ष को उन्होंने अपनी फिल्म में दिखाया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस दर्दनाक इतिहास को समझ सकें। विभाजन के दौरान लाखों परिवारों को अपने घर-बार छोड़ने पड़े थे। सनी देओल ने इस विषय पर बात करते हुए कहा कि उस समय का दर्द आज भी लोगों के दिलों में बसा है। उन्होंने बताया कि कैसे लोग अपने प्रियजनों से बिछड़ गए और कैसे उन्होंने नए सिरे से जीवन शुरू किया। देओल ने कहा कि यह इतिहास का सबसे दुखद अध्याय था, जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ा। अभिनेता ने अपनी फिल्म के माध्यम से इस विषय को पर्दे पर लाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे परिवार टूटकर भी खुद को संभालते हैं और नई जिंदगी शुरू करते हैं। देओल ने बताया कि विभाजन के दौरान लोगों ने जो संघर्ष किया, वह किसी भी फिल्म से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कहानी सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि लाखों लोगों की सच्चाई है। सनी देओल ने विभाजन के दौरान हुए दर्द और पीड़ा को याद करते हुए कहा कि उस समय का मंज़र देखकर आज भी रूह कांप जाती है। उन्होंने बताया कि कैसे लोग अपने घरों से बेदखल होकर नए देश में शरणार्थी बन गए। देओल ने कहा कि यह इतिहास का सबसे काला अध्याय था, जिसमें मानवता को सबसे ज्यादा चोट पहुंची। अभिनेता ने कहा कि विभाजन के दौरान जो परिवार टूट गए, उन्होंने अपनी हिम्मत से खुद को संभाला। उन्होंने बताया कि कैसे लोग अपने बच्चों को लेकर नए सिरे से जीवन शुरू करते हैं। देओल ने कहा कि यह संघर्ष किसी भी फिल्म से ज्यादा प्रभावशाली है, क्योंकि यह लाखों लोगों की कहानी है। सनी देओल ने अपनी फिल्म के माध्यम से इस विषय को लोगों तक पहुँचाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे परिवार टूटकर भी खुद को संभालते हैं। देओल ने बताया कि विभाजन के दौरान जो दर्द हुआ, वह आज भी लोगों के दिलों में बसा है। उन्होंने कहा कि यह इतिहास का सबसे दुखद अध्याय था, जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ा। अभिनेता ने कहा कि विभाजन के दौरान जो परिवार टूट गए, उन्होंने अपनी हिम्मत से खुद को संभाला। उन्होंने बताया कि कैसे लोग अपने बच्चों को लेकर नए सिरे से जीवन शुरू करते हैं। देओल ने कहा कि यह संघर्ष किसी भी फिल्म से ज्यादा प्रभावशाली है, क्योंकि यह लाखों लोगों की कहानी है।