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कानपुर: तीन कर्मचारियों की पदोन्नति रद्द, क्लर्क से चपरासी तक का सफर। विभागीय कार्रवाई के बाद।

कानपुर: तीन कर्मचारियों की पदोन्नति रद्द, क्लर्क से चपरासी तक का सफर। विभागीय कार्रवाई के बाद।

कानपुर: तीन कर्मचारियों की पदोन्नति रद्द, क्लर्क से चपरासी तक का सफर। विभागीय कार्रवाई के बाद।

कानपुर के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से एक बड़ी विभागीय कार्रवाई की खबर आई है, जहाँ प्रेमनाथ यादव, अमित यादव और नेहा श्रीवास्तव नामक तीन कर्मचारियों को क्लर्क पद से चपरासी के पद पर पदावनत कर दिया गया है। इस निर्णय ने पूरे कानपुर संभाग में हलचल मचा दी है, जिससे सरकारी कर्मचारियों के बीच जवाबदेही और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो-टोलरेंस (शून्य सहनशीलता) के संदेश को लेकर बहस छिड़ गई है।

यह पदोन्नति रद्द करने का आदेश एक नियमित आंतरिक जांच के बाद आया है, जिसमें पाया गया कि तीनों कर्मचारियों ने सरकारी फंड के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती थी। विशेष रूप से, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत लाभ लाभार्थियों को वितरित करने के लिए जिम्मेदार तीनों कर्मचारियों पर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। विभाग की ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था, जिससे वित्तीय अनियमितता हुई और योजना के तहत आवंटित धन के दुरुपयोग की संभावना बनी।

प्रारंभ में, तीनों कर्मचारियों को विभाग द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उनसे अपनी भूमिका स्पष्ट करने के लिए कहा गया था। हालाँकि, गहन जांच के बाद, जो उनकी कार्यप्रणाली और वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करने में सफल रही, जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय ने उनके खिलाफ अंतिम निर्णय सुनाया। आदेश में कहा गया है कि उनका आचरण प्रशासनिक नैतिकता के विपरीत है और यह एक उदाहरण पेश करने के लिए आवश्यक कदम है।

इस पदोन्नति रद्द करने का तत्काल और गहरा प्रभाव पड़ा है। प्रेमनाथ यादव, जो 15 वर्षों से अधिक समय से क्लर्क के रूप में कार्यरत थे, और उनके साथी, जिनके पास 10 से 20 वर्ष का सेवा अनुभव है, अब अपनी आजीविका और भविष्य की संभावनाओं को लेकर गहरे संकट में हैं। उनके परिवार, जो उनकी स्थिर आय पर निर्भर थे, अब आर्थिक अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उनके बच्चों

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