लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के किनारे रहने वाले लोगों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने वाली है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान होने वाले ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए एक नई योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत, एक्सप्रेसवे के किनारे रहने वाले घरों और बस्तियों को ध्वनि-रोधी (sound-proof) बनाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही, एक्सप्रेसवे पर वाहनों के हॉर्न और अन्य शोर को कम करने के लिए भी विशेष उपाय किए जाएंगे। यह कदम एक्सप्रेसवे के किनारे रहने वाले निवासियों की शिकायतों को दूर करने के लिए उठाया गया है। एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान भारी यातायात और निर्माण कार्य के कारण होने वाला शोर लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया था। सरकार का यह निर्णय लोगों को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। इस योजना के तहत, एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित घरों को ध्वनि-रोधी खिड़कियां, दरवाजे और दीवारें लगाने के लिए सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे पर ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विशेष उपकरण लगाए जाएंगे, जो यातायात के शोर को कम करने में मदद करेंगे। सरकार ने यह भी कहा है कि एक्सप्रेसवे के किनारे रहने वाले लोगों को शोर के स्तर की नियमित निगरानी की जाएगी। यदि किसी भी क्षेत्र में शोर का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य लोगों के जीवन और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न डाले। यह पहल उत्तर प्रदेश सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लोगों को बेहतर जीवन प्रदान करना है। एक्सप्रेसवे के निर्माण से राज्य के आर्थिक विकास को गति मिलेगी, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाए।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर ध्वनि प्रदूषण में कमी के लिए नई पहल

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