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शहीद-ए-आजम की 119वीं जयंती पर रंगारंग कार्यक्रम, क्रांतिकारी विरासत को संजोने का लिया संकल्प
कानपुर। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती के अवसर पर कानपुर में आयोजित कार्यक्रम देशभक्ति और क्रांतिकारी जज्बे से सराबोर रहा। शहीदों की याद में उठी आवाजों ने एक बार फिर कानपुर की उस ऐतिहासिक धरती को याद किया, जिसने आजादी के आंदोलन में अनेक क्रांतिकारियों को दिशा और ताकत दी थी।
शहीद भगत सिंह की जयंती पर गोल्डन क्लब एवं देव विला के संयुक्त तत्वावधान में शास्त्री भवन, खलासी लाइन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि अनुज थापर ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान भगत सिंह, उनके साथी क्रांतिकारी सुखदेव तथा कानपुर की क्रांतिकारी विरासत से जुड़े प्रसंगों ने माहौल को भावुक कर दिया।
अनुज थापर ने कहा कि “मैं क्रांतिकारियों की धरती कानपुर आकर अभिभूत हूं। यही वह धरती है, जहां मेरे दादा अमर शहीद सुखदेव ने क्रांति की दीक्षा ली थी।” उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह ने कानपुर में पत्रकारिता के माध्यम से भी देश और समाज को जागरूक करने का काम किया था। उनके दादा सुखदेव भी गणेश शंकर विद्यार्थी के व्यक्तित्व से बेहद प्रभावित थे।
भगत सिंह के विचार आज भी युवाओं के लिए मशाल
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह केवल एक नाम नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष, राष्ट्रप्रेम और युवाओं के अदम्य साहस का प्रतीक हैं। उनका जीवन बताता है कि देश और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा उम्र का मोहताज नहीं होता।
119वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में देशभक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। पंजाब की पारंपरिक सिख मार्शल आर्ट की प्रस्तुति ने दर्शकों में जोश भर दिया। वहीं क्रांतिकारी वस्तुओं की प्रदर्शनी में क्रांतिकारियों द्वारा लिखी गई पुस्तकें, 1857 के प्रतीक, अग्रगामी सामाजिक संघर्ष, जनजागरण और जनक्रांति से जुड़े समाचार पत्र, शुभचंद्र बोस का बक्सा तथा क्रांतिकारियों की दुर्लभ तस्वीरें आकर्षण का केंद्र रहीं।
क्रांतिकारियों की स्मृतियों को सहेजने का संकल्प
गोल्डन क्लब के संस्थापक अनुज निगम ने कहा कि संस्था का अगला उद्देश्य भगत सिंह जयंती समारोह के साथ-साथ कानपुर के अन्य सहयोगी क्रांतिकारियों की स्मृति में एक स्मारक तैयार करना है। क्लब के संरक्षक रवींद्र सिंह ने कहा कि संस्था गैरराजनीतिक है और यही उसकी ताकत है।
शांतनु चैतन्य ने कहा कि शहीदों को सलाम करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने पत्रकार शिरोमणि गणेश शंकर विद्यार्थी के बलिदान को याद करते हुए कहा कि भगत सिंह की तरह विद्यार्थी जी की स्मृतियों को भी शहर में सहेजने की जरूरत है।
कार्यक्रम में भगत सिंह के विश्वासपात्र साथी और क्रांतिकारी शिव वर्मा की पुत्रवधू कृष्णा वर्मा को “कानपुर रत्न सम्मान” प्रदान किया गया। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को “शान-ए-कानपुर” सम्मान से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में अग्रणी निगम, शिल्पा सिंह, नीति निगम, शिवम ओमर, अरुण कटियार, प्रखर श्रीवास्तव, डॉ. नमन सक्सेना, गोपाल तुलसियान, आदित्य पोद्दार, गजेंद्र सिंह, अजीत सिंह, राम शरण प्रजापति, नीरज सैनी, प्रकाश श्रीवास्तव, इंदा एवं ध्रुव निगम, विजय सिंह, रवींद्र सिंह, डॉ. रचना अवस्थी, डॉ. बिंदु सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
यह आयोजन सिर्फ एक जयंती समारोह नहीं था, बल्कि उस क्रांतिकारी चेतना को फिर से जगाने का प्रयास था, जिसकी गूंज कभी कानपुर की गलियों से पूरे देश तक पहुंची थी। भगत सिंह का सपना और उनके साथियों का बलिदान आज भी नई पीढ़ी को यह संदेश देता है—अन्याय के सामने झुको नहीं, देश और समाज के लिए आगे बढ़कर आवाज उठाओ। रिपोर्ट. अनुज तिवारी