कुलदीप चन्दन
बिठूर

- रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य, 108 चांदी के कलशों से हुआ महाभिषेक
- 1008 व्यंजनों का लगाया भोग, एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए राधा माधव के दर्शन

कानपुर। मैनावती मार्ग स्थित इस्कॉन कानपुर में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। तेज बारिश और खराब मौसम के बावजूद मंदिर में श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। बड़ी संख्या में भक्त श्री श्री राधा माधव के दर्शन और जन्मोत्सव के साक्षी बने। मंदिर परिसर को आकर्षक झांकियों, रंग-बिरंगी रोशनी और देश-विदेश से मंगाए गए दुर्लभ पुष्पों से सजाया गया था। पूरा परिसर ब्रज के स्वरूप में नजर आ रहा था।

महोत्सव की शुरुआत सुबह 4:30 बजे मंगल आरती से हुई। इसके बाद दर्शन, आरती और गुरु पूजा के कार्यक्रम हुए। इस्कॉन मुंबई से आए वक्ता सुदामा प्रभु ने श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य और उनकी लीलाओं का वर्णन किया। वृंदावन के कारीगरों द्वारा तैयार रत्नजड़ित पोशाक में सजे श्री श्री राधा माधव के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहे।

दिनभर तुलसी अर्पण और अभिषेक के कार्यक्रम चलते रहे। रात आठ बजे चांदी के कलश से अभिषेक शुरू हुआ। रात 11:30 बजे 108 चांदी के कलशों से श्री श्री राधा माधव का भव्य महाभिषेक किया गया। भगवान को 1008 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।

रात 12 बजे जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ, मंदिर परिसर मृदंग और करताल की झंकार से गूंज उठा। हरे कृष्ण महामंत्र के संकीर्तन के बीच महाआरती की गई। महाभिषेक के बाद श्रद्धालुओं को कृष्ण प्रसाद वितरित किया गया। इस्कॉन पदाधिकारियों के अनुसार, जन्माष्टमी पर एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर श्री श्री राधा माधव के दर्शन किए।

चार दिन चला महोत्सव

इस्कॉन कानपुर में जन्माष्टमी महोत्सव तीन से छह सितंबर तक चार दिनों तक चला। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, विशेष नृत्य और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियां भी हुईं। मंदिर अध्यक्ष प्रेम हरिनाम प्रभु ने मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं का स्वागत किया। भव्य सजावट और धार्मिक आयोजनों के चलते इस्कॉन परिसर में कानपुरवासियों को ब्रज की अनुभूति होती रही।