कानपुर में एक विशेष जांच के दौरान एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जो पिछले 13 सालों से फर्जी डिग्रियों का निर्माण और वितरण कर रहा था। यह ऑपरेशन न केवल स्थानीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ था, जिसका मुख्य लक्ष्य यूके जैसे देशों में जाने वाले लोग थे। जांच में पता चला है कि यह पूरा तंत्र एक 'फैक्ट्री' की तरह काम करता था, जो फर्जी शैक्षणिक रिकॉर्ड तैयार करता था। इस पूरे मामले में मुख्य भूमिका निभाने वाले लोग फिशिंग के जरिए लोगों की व्यक्तिगत जानकारी हासिल करते थे, जिसका इस्तेमाल वे विश्वसनीय फर्जी प्रोफाइल और प्रमाण पत्र बनाने के लिए करते थे।