कानपुर नगर, 9 सितंबर 2026।
कानपुर के एमएसएमई उद्यमियों के लिए बुधवार का दिन कारोबार के नए अवसरों की जानकारी लेकर आया। एचबीटीयू कैंपस स्थित क्षेत्रीय उद्योग कार्यालय सभागार में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय एमएसएमई विकास कार्यशाला में विशेषज्ञों ने उद्यमियों को निर्यात, सरकारी खरीद, GeM, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग, गुणवत्ता, पैकेजिंग, बौद्धिक संपदा और वित्तीय सुविधाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।

कार्यशाला का आयोजन एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर, उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में विभिन्न औद्योगिक संगठनों के सहयोग से किया गया। इसमें 200 से अधिक एमएसएमई इकाइयों एवं सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

उत्तर प्रदेश का निर्यात 2.01 लाख करोड़ के पार

मुख्य अतिथि आलोक द्विवेदी, संयुक्त विदेश व्यापार महानिदेशक, कानपुर ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, लेदर, एग्रो उत्पाद और एमएसएमई उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मजबूत हो रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश का निर्यात पहली बार 2.01 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा है और देश के कुल मर्चेंडाइज निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 5.2 प्रतिशत हो गई है। इससे प्रदेश देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है।

उन्होंने उद्यमियों से वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुरूप उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने का आह्वान किया।

GeM बना एमएसएमई के लिए बड़ा बाजार

GeM इंडिया की प्रियंवदा अग्रवाल ने सरकारी खरीद में एमएसएमई के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में GeM के माध्यम से 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की खरीद हो चुकी है तथा कुल खरीद में एमएसएमई की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है।

उन्होंने उद्यमियों को GeM पर पंजीकरण, उत्पादों की लिस्टिंग और सरकारी ऑर्डर प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए जरूरी सावधानियां भी बताईं।

निर्यात के साथ वित्त और बीमा पर भी जोर

तकनीकी सत्र में एस.के. निराला (DGFT), आलोक श्रीवास्तव (FIEO), ए.के. सोनी (एक्जिम बैंक) और शाहिद अहमद (ECGC) ने आयात-निर्यात नीति, अंतरराष्ट्रीय बाजार, निर्यात वित्त और विदेशी खरीदारों से जुड़े जोखिमों की जानकारी दी।

गौरव कुमार मौर्य, सहायक आयुक्त, उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो ने प्रदेश की निर्यात नीति से उद्यमियों को अवगत कराया।

ई-कॉमर्स और पैकेजिंग से बढ़ेगी बाजार पहुंच

अंशुल गुप्ता, जोनल मोबिलाइजेशन मैनेजर, वॉलमार्ट वृद्धि ने डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स के जरिए एमएसएमई उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के तरीके बताए।

डॉ. अंशुमान श्रीवास्तव, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग ने आधुनिक पैकेजिंग को उत्पाद की बाजार स्वीकार्यता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। वहीं प्रीति गंगवार, नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल ने एमएसएमई लीन योजना, वाटर ऑडिट और एनर्जी ऑडिट के फायदे बताए।

आशुतोष राय, उप निदेशक, BIS ने कहा कि वैश्विक बाजार में जगह बनाने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का पालन बेहद जरूरी है।

ब्रांड और कारोबार को कानूनी सुरक्षा की जानकारी

कार्यशाला में एमएसएमई पॉलिसी-2022, लेदर पॉलिसी, ट्रेडमार्क, पेटेंट और डिजाइन पर भी चर्चा हुई। नवदीप श्रीधर, ट्रेडमार्क एवं पेटेंट अटॉर्नी ने उद्यमियों को अपने ब्रांड, उत्पाद और नवाचार को बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से सुरक्षित करने की जानकारी दी।

वित्तीय सत्र में जे.के. गुप्ता, महाप्रबंधक, SIDBI ने एमएसएमई के लिए उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं की जानकारी दी। वहीं RXIL-TReDS के संकल्प त्रिपाठी और अरूर्वे गैरोला ने TReDS के माध्यम से बिल डिस्काउंटिंग और कारोबार में कार्यशील पूंजी की उपलब्धता समझाई।

आदित्य चन्द्र, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर, बैंक ऑफ बड़ौदा, कानपुर नगर ने उद्यमियों को विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं से अवगत कराया।

कानपुर मंडल में औद्योगिक विस्तार की बड़ी संभावनाएं

सुनील कुमार, संयुक्त आयुक्त उद्योग, कानपुर मंडल ने कहा कि कानपुर मंडल लेदर, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं रखता है। उन्होंने कहा कि सरकारी नीतियों और सुविधाओं का लाभ लेकर स्थानीय उद्यमी अपने कारोबार को नई ऊंचाई दे सकते हैं।

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने उद्यमियों के सवालों और समस्याओं का समाधान भी किया। एमएसएमई-विकास कार्यालय के निदेशक विष्णु कुमार वर्मा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों को नीतिगत, वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें देश और दुनिया के बाजारों से जोड़ना है।

कार्यक्रम का समन्वय अमित बाजपेयी, सहायक निदेशक, एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर ने किया।