लखनऊ: बिजली कनेक्शन को मौलिक अधिकार मानने का इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश, वरिष्ठ नागरिक को राहत

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें बिजली कनेक्शन को मौलिक अधिकार घोषित किया गया है। अदालत ने माना है कि बिजली सेवा से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। यह फैसला लखनऊ के एक वरिष्ठ नागरिक के मामले से जुड़ा है, जिसे पिछले कई महीनों से बिजली कनेक्शन नहीं मिल रहा था। बिजली विभाग ने तकनीकी जांच का बहाना बनाकर उनका आवेदन रोक दिया था।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले की गंभीरता पर विचार किया। अदालत ने कहा कि 21वीं सदी में बिजली कोई विलासिता नहीं, बल्कि जीवन के लिए अनिवार्य है। यह स्वास्थ्य, शिक्षा और गरिमा से जुड़ी है। अदालत ने बिजली विभाग को कड़ी फटकार लगाई और तत्काल कनेक्शन देने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने विभाग को निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसी शिकायतों के लिए एक सरल और निश्चित प्रक्रिया बनाई जाए।
इस फैसले का पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक मिसाल है। यह नागरिकों को सशक्त बनाता है और सरकारी विभागों की जवाबदेही तय करता है। अदालत ने सामाजिक न्याय के सिद्धांत को सुदृढ़ किया है। बिजली जैसे आवश्यक संसाधन का अधिकार हर नागरिक का जन्मसिद्ध अधिकार है।
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