* 33 कर्मचारी अनुपस्थित मिले, वेतन रोकने के निर्देश; अस्पताल, ब्लॉक कार्यालय और मॉडल स्कूल निर्माण में मिलीं गंभीर खामियां*
कानपुर नगर। मुख्य विकास अधिकारी ने 25 जून को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिधनू, विकास खंड कार्यालय बिधनू तथा ग्राम पंचायत खेरसा में निर्माणाधीन मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं, कार्यालय व्यवस्था और निर्माण कार्य में कई गंभीर खामियां सामने आईं, जिस पर संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिधनू में निरीक्षण के दौरान कुल 33 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। इनमें नियमित, अनुबंधित और संविदा कर्मचारी शामिल हैं। चिकित्सा अधीक्षक भी निर्धारित समय से लगभग 50 मिनट की देरी से पहुंचे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सभी अनुपस्थित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लेकर गुण-दोष के आधार पर 25 जून का एक दिन का वेतन एवं मानदेय रोकने के निर्देश दिए गए।
अस्पताल के आयुष्मान वार्ड में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली और निरीक्षण के समय कोई मरीज भर्ती नहीं था। प्रसूता कक्ष के निरीक्षण में जननी सुरक्षा योजना के भुगतान में देरी का मामला भी सामने आया। एक लाभार्थी ने योजना की धनराशि न मिलने की शिकायत की, जिस पर चिकित्सा अधीक्षक ने पिछले वर्ष के आवेदन लंबित होने की बात कही। सीडीओ ने सभी पात्र प्रसूताओं के आवेदन 48 घंटे के भीतर पूर्ण कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद विकास खंड कार्यालय बिधनू के निरीक्षण में भी लापरवाही उजागर हुई। यहां एक नियमित कर्मचारी और एक संविदा तकनीकी सहायक बिना सूचना अनुपस्थित मिले। खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिए गए कि अनुपस्थित कर्मचारियों का जियो-टैग फोटो और स्पष्टीकरण प्राप्त होने के बाद ही मानदेय का भुगतान किया जाए।
सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) कार्यालय में अभिलेख अद्यतन नहीं मिले। ग्राम पंचायतों में राज्य वित्त, चौदहवें और पंद्रहवें वित्त आयोग की उपलब्ध धनराशि का 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं किया गया था तथा धनराशि के उपयोग की कोई स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं की जा सकी। इस पर सीडीओ ने नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
ग्राम पंचायत खेरसा में निर्माणाधीन मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय के निरीक्षण में भी कार्य की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया गया। लगभग 24 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में अब तक केवल 26 प्रतिशत कार्य ही पूरा हुआ है। निर्माण स्थल पर ईंटों की गुणवत्ता भी प्रथम दृष्टया संतोषजनक नहीं पाई गई। सीडीओ ने ईंटों की जांच किसी प्रतिष्ठित सरकारी संस्था से कराने तथा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए निर्माण कार्य की गति तेज करने के निर्देश भी दिए।
सीडीओ ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा सभी संबंधित अधिकारियों को जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।