कानपुर में एक होनहार छात्रा द्वारा आत्महत्या का मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और अभिभावकों की अपेक्षाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रा ने 10वीं में 95% अंक लाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन 92% अंक आने के बाद वह गहरे तनाव में आ गई। बताया जा रहा है कि परिणाम से निराश होकर उसने यह कठोर कदम उठा लिया।
छात्रा केंद्रीय विद्यालय, अरमापुर की छात्रा थी और पढ़ाई में हमेशा अच्छी मानी जाती थी। घटना से पहले उसने अपने कुछ साथियों को वॉयस मैसेज भी भेजा, जिसमें उसने खुद को ‘जिंदा लाश’ जैसा महसूस होने की बात कही थी। परिवार के अनुसार, उस पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव था, जो धीरे-धीरे मानसिक तनाव में बदल गया।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों पर अत्यधिक अपेक्षाओं का बोझ किस हद तक खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों से संवाद बनाए रखना चाहिए और अंकों से ज्यादा उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।
