एक दिन का वेतन काटने के निर्देश, निजी वेंडरों को किसकी अनुमति से मिली जगह? रोजगार मेलों के चयनित अभ्यर्थियों का भी होगा सत्यापन
कानपुर नगर। सरकारी कार्यालयों में व्यवस्थाओं और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के तेवर सख्त दिखाई दे रहे हैं। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे प्रादेशिक सेवायोजन कार्यालय पहुंचे डीएम के औचक निरीक्षण में एक साथ कई कमियां सामने आईं। पांच वरिष्ठ सहायक अनुपस्थित मिले, कार्यालय के बाहर निजी वेंडर पंजीकरण करते मिले, कर्मचारियों के कार्य-वितरण का अद्यतन रिकॉर्ड नहीं मिला और कार्यालय की स्वच्छता भी संतोषजनक नहीं पाई गई।
निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने केवल कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रखा, बल्कि सेवायोजन कार्यालय की कार्यप्रणाली, रोजगार मेलों की वास्तविक उपयोगिता और लंबित प्रकरणों तक का विस्तृत हिसाब मांग लिया।
पांच वरिष्ठ सहायक गैरहाजिर, वेतन काटने के निर्देश
उपस्थिति पंजिका की जांच में वरिष्ठ सहायक राकेश कुमार सिंह, संजीव कुमार श्रीवास्तव, रजनी वर्मा, सतीश पाण्डेय और क्षेम अग्निहोत्री अनुपस्थित मिले।
डीएम ने पांचों कार्मिकों का एक दिन का वेतन काटने तथा एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी पूछा गया कि इन कर्मचारियों को कार्यालय से अनुपस्थित रहने की अनुमति आखिर किस अधिकारी ने दी थी।
जिलाधिकारी ने साफ किया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोहराई गई तो केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि संबंधित पर्यवेक्षणीय अधिकारी की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
अभ्यर्थियों के लिए पंजीकरण मुफ्त, फिर बाहर क्यों बैठे थे निजी वेंडर?
निरीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु सेवायोजन पोर्टल पर पंजीकरण से जुड़ा रहा।
कार्यालय के मुख्य द्वार के सामने निजी वेंडर अभ्यर्थियों का पंजीकरण करते मिले, जबकि कार्यालय के भीतर अभ्यर्थियों के लिए निःशुल्क पंजीकरण की समुचित व्यवस्था नहीं थी।
डीएम ने तत्काल निःशुल्क पंजीकरण काउंटर/हेल्प डेस्क स्थापित करने और इसकी जानकारी मुख्य द्वार सहित प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही प्रशासन ने यह भी जानना चाहा है कि निजी वेंडरों को कार्यालय के बाहर बैठने की अनुमति किस अधिकारी और किस व्यवस्था के तहत दी गई थी। इसकी रिपोर्ट तीन कार्य दिवस में मांगी गई है।
यानी अब यह भी जांच के दायरे में है कि सरकारी कार्यालय में आने वाले बेरोजगार अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और निजी पंजीकरण व्यवस्था के बीच वास्तविक स्थिति क्या है।
चार कर्मचारी लेखा अनुभाग में, काम का हिसाब भी मांगा
निरीक्षण में प्रशासनिक अधिकारी की तैनाती के बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों का अद्यतन कार्य-वितरण उपलब्ध नहीं मिला।
लेखा अनुभाग में चार कर्मचारियों की तैनाती पाए जाने पर जिलाधिकारी ने प्रत्येक अनुभाग के वास्तविक कार्यभार बनाम कर्मचारियों की तैनाती का औचित्य स्पष्ट करने को कहा है।
इसके लिए तीन कार्य दिवस में विस्तृत आख्या प्रस्तुत करनी होगी।
रोजगार मेलों की सफलता पर भी उठे सवाल
सेवायोजन कार्यालय का मूल उद्देश्य बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। ऐसे में डीएम ने वर्ष 2026 में आयोजित रोजगार मेलों की वास्तविक प्रभावशीलता की जांच के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि कितने अभ्यर्थियों का चयन हुआ।
अब यह भी पता लगाया जाएगा कि—
चयनित अभ्यर्थियों में कितनों ने वास्तव में नौकरी ज्वाइन की?
कितने अभ्यर्थी वर्तमान में संबंधित संस्थान में कार्यरत हैं?
रोजगार मेले में हुआ चयन वास्तव में रोजगार में कितना बदला?
मुख्य विकास अधिकारी को रोजगार मेलों में चयनित कम से कम 20 प्रतिशत अभ्यर्थियों का नमूना आधारित सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
नए नियोजकों और रिक्तियों का भी खुलेगा पूरा हिसाब
पिछले एक वर्ष में सेवायोजन कार्यालय में पंजीकृत नए नियोजकों का भी रिकॉर्ड खंगाला जाएगा।
प्रत्येक माह के आधार पर यह विवरण मांगा गया है कि कितने नए नियोजक पंजीकृत हुए, उन्होंने कितनी रिक्तियां अधिसूचित कीं और उन रिक्तियों के सापेक्ष कितने अभ्यर्थियों का चयन एवं वास्तविक नियोजन हुआ।
इससे रोजगार मेले और सेवायोजन कार्यालय की गतिविधियों के वास्तविक परिणाम का आकलन किया जा सकेगा।
सफाई व्यवस्था भी मिली असंतोषजनक
औचक निरीक्षण में कार्यालय परिसर की स्वच्छता भी संतोषजनक नहीं मिली। डीएम ने तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए।
तीन दिन के भीतर सफाई से पहले और सफाई के बाद के दिनांकित फोटोग्राफ सहित अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है।
इसके साथ ही अभ्यर्थियों के लिए बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, सूचना पट्ट, शिकायत एवं सुझाव व्यवस्था तथा सेवायोजन पोर्टल से संबंधित सहायता को व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए।
अब हर लंबित प्रकरण का हिसाब देना होगा
डीएम ने कार्यालय के प्रत्येक अनुभाग में लंबित प्रकरणों की अनुभागवार और कर्मचारीवार सूची तैयार करने को कहा है।
सूची में यह भी दर्ज होगा कि कोई प्रकरण कितने समय से लंबित है और उसके लंबित रहने का कारण क्या है।
निर्धारित समय-सीमा से अधिक लंबित मामलों को अलग से चिन्हित कर उनके निस्तारण की समयबद्ध कार्ययोजना सात कार्य दिवस में प्रस्तुत करनी होगी।
रोजगार आयोग के बाद समिति की बैठकें हुईं या नहीं, मांगा रिकॉर्ड
वर्ष 2026 में जनपद स्तरीय समिति की बैठकों का तिथिवार विवरण भी तलब किया गया है।
यदि वर्ष 2026 में समिति की कोई बैठक आयोजित नहीं हुई है तो बैठक न होने का कारण, बैठक आयोजित कराने के लिए किए गए पत्राचार और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी का विवरण तीन कार्य दिवस में देना होगा।
एक सप्ताह में मांगी गई बिंदुवार अनुपालन रिपोर्ट
सहायक निदेशक, सेवायोजन को निरीक्षण के दौरान दिए गए सभी निर्देशों पर अभिलेख, विवरण, फोटोग्राफ और सत्यापन रिपोर्ट सहित बिंदुवार अनुपालन आख्या एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
बड़ा सवाल यही है—कार्रवाई के बाद व्यवस्था कितनी बदलेगी?
डीएम के औचक निरीक्षण ने सेवायोजन कार्यालय की कई व्यवस्थाओं को जांच के दायरे में ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पांच अनुपस्थित कर्मचारियों के स्पष्टीकरण, निजी वेंडरों की अनुमति, रोजगार मेलों के वास्तविक परिणाम, लंबित प्रकरणों और कार्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर मांगी गई रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं।
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