लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार वर्क फ्रॉम होम (WFH) नीति पर एक बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। लेबर डिपार्टमेंट में एक हाई-लेवल मीटिंग होने वाली है, जिसमें इस पर चर्चा की जाएगी कि क्या राज्य के सभी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी जाए। यह बैठक श्रम विभाग के अधिकारियों और वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ होगी, जो इस नीति के कार्यान्वयन के लिए एक रूपरेखा तैयार करने के लिए बैठक करेंगे। यह निर्णय राज्य में COVID-19 की स्थिति और आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में पहले से ही कई निजी कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की नीति अपना ली है, और अब सरकार द्वारा इसे औपचारिक रूप दिए जाने की संभावना है। बैठक में इस बात पर विचार किया जाएगा कि किन श्रेणियों की नौकरियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी जा सकती है और इसके लिए क्या शर्तें होंगी। लेबर डिपार्टमेंट की बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि वर्क फ्रॉम होम नीति का लाभ राज्य सरकार के कर्मचारियों को मिलेगा या नहीं। यदि यह नीति स्वीकृत हो जाती है, तो यह उत्तर प्रदेश के लाखों सरकारी और अर्ध-सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत का विषय होगा। बैठक में वर्क फ्रॉम होम के लिए बुनियादी ढांचे, जैसे इंटरनेट कनेक्टिविटी और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी चर्चा की जाएगी। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। वर्क फ्रॉम होम नीति से न केवल कर्मचारियों को लचीलापन मिलेगा, बल्कि इससे राज्य में निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बैठक के बाद सरकार द्वारा आधिकारिक घोषणा की जा सकती है, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से इस नीति को लागू किया जाएगा।