उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से चुनावी प्रक्रिया और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। उनके अनुसार, आगामी चुनावों में ईवीएम के माध्यम से भारी धांधली की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य चंद्रशेखर आजाद को चुनाव जिताना है। मायावती ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि चुनाव निष्पक्ष रूप से कराने हैं, तो ईवीएम को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया जाना चाहिए और केवल बैलेट पेपर के माध्यम से ही मतदान प्रक्रिया संपन्न कराई जानी चाहिए। यह बयान राज्य की राजनीतिक परिदृश्य में एक नया और तीखा विवाद उत्पन्न कर चुका है। इस आरोप ने चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल दोनों की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिससे आगामी चुनावी मुकाबलों का माहौल काफी गरमा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगते हैं। बसपा प्रमुख का यह कदम विपक्षी दलों के उस पुराने नैरेटिव को और बल देता है जिसमें वे हमेशा से ईवीएम की विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त करते आए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसका असर आगामी दिनों में देखने को मिल सकता है।
मायावती का आरोप: ईवीएम में धांधली कर चंद्रशेखर आजाद को भाजपा द्वारा जिताने का प्रयास
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