उत्तर प्रदेश में कानून के शासन को सुदृढ़ करने के प्रति एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता देखी जा रही है, जो राज्य के शासन और समाज के प्रति दृष्टिकोण में एक नए युग का सूत्रपात कर रही है। यह पहल भीष्म पितामह के 'राजधर्म' के सिद्धांत से प्रेरणा लेती है, जो शासक के लिए न्याय और धर्म की रक्षा करना सर्वोपरि कर्तव्य मानती है। राज्य प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि न्याय केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक मौलिक सिद्धांत है जो प्रत्येक नागरिक के जीवन का आधार होना चाहिए। यह दृष्टिकोण शासन के प्रति एक ऐसे मॉडल की ओर बदलाव का संकेत देता है जहाँ सत्ता का प्रयोग मनमाने ढंग से नहीं, बल्कि स्थापित कानूनी और नैतिक मानकों के अनुसार किया जाता है।
उत्तर प्रदेश में कानून के शासन के प्रति नई प्रतिबद्धता, न्यायपालिका की भूमिका में वृद्धि

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