उत्तर प्रदेश विधान सभा का सत्र आज हंगामे और राजनीतिक बयानबाजी के बीच शुरू हुआ। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। इस हंगामे के बीच ही वित्त मंत्री ने वर्ष 2023-24 के लिए 59 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। यह बजट राज्य सरकार की अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पेश किया गया है, जिसमें विभिन्न विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन का प्रावधान किया गया है। बजट पेश किए जाने के दौरान विपक्ष ने सरकार पर बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान न देने का आरोप लगाते हुए सदन में शोर-शराबा किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के व्यवहार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और उन्हें राज्य के विकास कार्यों में बाधा डालने के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की राजनीति केवल व्यवधान डालने तक सीमित है और वे जनता की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को चेतावनी दी कि वे सदन की मर्यादा का पालन करें और रचनात्मक बहस में भाग लें। सरकार का पक्ष था कि यह अनुपूरक बजट राज्य के विकास और जन कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक है। सरकार ने विपक्ष के व्यवहार को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया और कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को सदन की कार्यवाही बाधित करने का अधिकार नहीं है। विपक्ष का तर्क था कि सरकार जनता की वास्तविक समस्याओं, जैसे बेरोजगारी और महंगाई, पर ध्यान नहीं दे रही है। उनका कहना था कि सरकार की नीतियां जनविरोधी हैं और इसीलिए वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हंगामे और तीखी बयानबाजी के बावजूद, सरकार ने अपना एजेंडा आगे बढ़ाया और अनुपूरक बजट पर चर्चा शुरू की। विधानसभा का सत्र हंगामे के बीच चलता रहा और सरकार ने बजट को पारित कराने का प्रयास किया। यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में बढ़ते तनाव को दर्शाती है और आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है। सरकार और विपक्ष के बीच यह गतिरोध राज्य के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान में बाधा बन सकता है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में हंगामे के बीच 59 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट पेश, मुख्यमंत्री योगी ने विपक्ष को घेरा
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