उन्नाव में एक फरार अभियुक्त के घर पर विशेष न्यायालय के आदेश पर नोटिस चस्पा किया गया है। यह कार्रवाई न्यायालय की अवमानना और अभियुक्त की अनुपस्थिति के कारण की गई है। इस दौरान, अभियुक्त की सार्वजनिक सूचना देने के लिए ढोल बजाकर उसके घर के आसपास के क्षेत्र में घोषणा की गई। पुलिस और न्यायालय प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि स्थानीय समुदाय को इस कानूनी कार्रवाई की जानकारी मिले। इस प्रकार की कार्रवाई न्यायालय की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने और अभियुक्तों को कानूनी दायित्वों के प्रति सचेत करने के उद्देश्य से की जाती है। विशेष न्यायालय ने अभियुक्त के विरुद्ध जारी वारंट और नोटिस को तामील करने के लिए यह कदम उठाया। चूंकि अभियुक्त लगातार फरार चल रहा था, इसलिए सामान्य तामील की प्रक्रिया विफल हो गई थी। इसके पश्चात, न्यायालय ने सार्वजनिक सूचना जारी करने का निर्देश दिया। इस निर्देश के अनुपालन में, पुलिस टीम ने अभियुक्त के निवास पर जाकर नोटिस चस्पा किया। यह नोटिस न्यायालय के आगामी आदेशों और अभियुक्त की उपस्थिति की अनिवार्यता के बारे में जानकारी प्रदान करता है। ढोल बजाने की परंपरा का उपयोग इस कार्रवाई में इसलिए किया गया क्योंकि यह स्थानीय स्तर पर व्यापक सूचना फैलाने का एक प्रभावी तरीका है। पुलिस कर्मियों ने घर के आसपास के मोहल्ले में ढोल बजाते हुए यह घोषणा की कि अभियुक्त को न्यायालय में उपस्थित होना अनिवार्य है। यह कदम न केवल अभियुक्त के परिवार और पड़ोसियों को सूचित करने के लिए था, बल्कि समाज में यह संदेश देने के लिए भी था कि कानून से भागना असंभव है। सार्वजनिक घोषणा के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि न्यायालय की अवमानना पर गंभीर कार्रवाई हो सकती है। पुलिस की इस कार्रवाई में स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग रहा। थाना प्रभारी और न्यायालय के अधिकारियों ने मिलकर इस प्रक्रिया को संपन्न किया। यह संयुक्त प्रयास सुनिश्चित करता है कि कानूनी कार्रवाई पारदर्शी और निष्पक्ष हो। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब ऐसी कार्रवाई की गई है, लेकिन ढोल बजाकर सूचना देना एक विशेष कदम माना गया है। इससे लोगों में जागरूकता बढ़ती है और वे कानून के महत्व को समझते हैं। इस घटना के बाद, अभियुक्त के परिवार और स्थानीय समुदाय में हलचल मच गई है। परिवार के सदस्य अब अभियुक्त की तलाश में लगे हैं ताकि वह न्यायालय में उपस्थित हो सके। वहीं, स्थानीय लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि न्यायालय और पुलिस की यह संयुक्त कार्रवाई कानून के प्रति कितनी गंभीर है। इस प्रकार, उन्नाव में यह कार्रवाई न केवल एक कानूनी प्रक्रिया थी, बल्कि समाज को कानून के प्रति जागरूक करने का एक माध्यम भी बनी।