डीएम से मिला महाकविभूषण फाउंडेशन का प्रतिनिधिमंडल, जन्मभूमि के विकास को लेकर सौंपा ज्ञापन

कानपुर, 3 अक्टूबर। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि जल्द ही महाकविभूषण की जन्मभूमि टिकवांपुर को नए सिरे से विकसित किया जाएगा। समाजसेवी रवींद्र कुमार मिश्र ‘विपिन’ द्वारा प्रशासन को दान दिए गए भवन में महिला अस्पताल एवं प्रसूति केंद्र खुलने तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत एक चिकित्सक और महिला चिकित्सक प्रतिदिन बैठकर मरीजों को देखेंगे।

महाकविभूषण फाउंडेशन के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को जिलाधिकारी से मुलाकात कर टिकवांपुर से जुड़ी समस्याओं और विकास की मांगों से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने उस भवन, जहां पहले प्राथमिक विद्यालय चलता था, में ग्रामीणों द्वारा मवेशी बांधने और भूसा रखने पर रोक लगाकर वहां प्रेक्षागृह (ऑडिटोरियम) बनाने की मांग की। साथ ही महाकविभूषण की फुलवारी में जमा कूड़े-कचरे को हटाकर सफाई कराने की मांग रखी।

घाटमपुर तहसील का टिकवांपुर महाकविभूषण की जन्मभूमि है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कभी पाठ्यक्रमों में महाकविभूषण की जीवनी पढ़ाई जाती थी और उत्तर प्रदेश के साथ मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र में भी उनकी विशेष पहचान थी। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने भी अपने ग्रंथों में उन्हें हिंदुत्व का प्रतिनिधि कवि माना है। छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराज छत्रसाल के दरबार से जुड़े महाकविभूषण ने हिंदू गौरव गाथा पर कई खंड काव्य लिखे।

ज्ञापन में कहा गया कि टिकवांपुर से चिकित्सा केंद्र काफी दूर होने के कारण समय पर इलाज न मिलने से महिलाओं को परेशानी होती है। इसलिए महाकविभूषण की स्मृति में शैया युक्त प्रसूति केंद्र एवं चिकित्सालय की स्थापना जल्द की जाए। ऑडिटोरियम बनने से विभिन्न संस्थाओं और विश्वविद्यालयों में महाकविभूषण पर केंद्रित संवाद व कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे।

प्रतिनिधिमंडल ने हमीरपुर रोड से टिकवांपुर तक करीब एक किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराकर चौड़ा करने की भी मांग की। बताया गया कि मार्ग पर कच्चे-पक्के निर्माण होने से बड़े वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते और अग्निकांड की स्थिति में अग्निशमन वाहन भी प्रभावित होते हैं।

ज्ञापन में घाटमपुर तापीय विद्युत परियोजना का नाम महाकविभूषण तापीय विद्युत परियोजना करने तथा जन्मस्थली के ग्रामीणों के लिए परियोजना में नौकरी का कोटा निर्धारित करने की मांग भी की गई। इसके अलावा अमृत सरोवर योजना के तहत बने तालाबों से अतिक्रमण और जलीय पौधे हटाकर सफाई कराने तथा वर्षा जल संचयन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग रखी गई।