पीलीभीत में श्रावण मास के पवित्र अवसर पर, भगवान शिव के भक्तों, कांवड़ियों के लिए एक भव्य आयोजन किया गया। जिला प्रशासन द्वारा मंडी परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में, जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) ने स्वयं आगे बढ़कर कांवड़ियों को भोजन परोसा, जो प्रशासनिक संवेदनशीलता और जनसेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस आयोजन ने न केवल थके हुए कांवड़ियों को राहत दी, बल्कि प्रशासन और श्रद्धालु जनता के बीच के बंधन को भी सुदृढ़ किया। मंडी परिसर में 'बम-बम भोले' के जयकारों से गूँजता वातावरण भक्ति और सेवा की भावना का अद्वितीय संगम बन गया। कांवड़ यात्रा, जो हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक है, में लाखों श्रद्धालु गंगा नदी के तटों से पवित्र जल लाने के लिए पैदल यात्रा करते हैं। यह यात्रा अत्यधिक भक्ति और कठिन परिश्रम का प्रतीक है। पीलीभीत में आयोजित यह आयोजन इसी परंपरा का एक हिस्सा है, जहाँ प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इन यात्रियों की सेवा करना और उनकी यात्रा को सुगम बनाना है। डीएम की व्यक्तिगत भागीदारी इस प्रतिबद्धता को एक नई ऊँचाई प्रदान करती है और यह संदेश देती है कि प्रशासन जनता की सेवा के लिए सदैव तत्पर है। जैसे ही कांवड़ियों के जत्थे मंडी परिसर पहुँचे, उनका स्वागत एक भव्य स्वागत समारोह के साथ किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ की थीं। ठंडे पानी की व्यवस्था, विश्राम स्थल और चिकित्सा सहायता जैसे आवश्यक सेवाएँ परिसर में उपलब्ध थीं। डीएम की उपस्थिति ने इस आयोजन में एक विशेष गरिमा जोड़ दी, जिससे यह आयोजन केवल एक प्रशासनिक कर्तव्य नहीं बल्कि एक व्यक्तिगत सेवा (सेवा) का रूप ले गया। कांवड़ियों के चेहरों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थकान और संतोष इस आयोजन की सफलता का प्रमाण थी। भोजन सेवा इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रही। शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था की गई थी, जिसमें पूरियों, सब्जी, कढ़ी-चावल, खीर और सत्तू जैसे पौष्टिक व्यंजन शामिल थे। डीएम ने स्वयं थालियाँ लेकर कांवड़ियों को भोजन परोसा, जो विनम्रता और सेवा का एक सशक्त संदेश था। भोजन वितरण की प्रक्रिया अत्यंत व्यवस्थित थी, जिससे किसी भी श्रद्धालु को कठिनाई का सामना न करना पड़े। यह केवल भोजन नहीं था, बल्कि एक 'प्रसाद' था, जिसे भक्तों के लिए तैयार किया गया था। डीएम द्वारा भोजन कराने की इस छवि ने सामाजिक और प्रशासनिक बाधाओं को समाप्त कर दिया और मानवीय संवेदना की सर्वोच्च मिसाल पेश की। मंडी परिसर का वातावरण भक्ति के नारों से गुंजायमान था। कांवड़ियों के समूह 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूँज रहे थे। भक्ति गीतों और ढोल की थाप ने पूरे क्षेत्र को एक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया था। यह दृश्य अत्यंत विस्मयकारी था, जहाँ एक ओर प्रशासन की व्यवस्था और दूसरी ओर जनता की अगाध श्रद्धा दिखाई दे रही थी। यह वातावरण इस बात का प्रमाण था कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जन-विश्वास का मिलन होता है, तो वह समाज के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करता है। पीलीभीत के डीएम का यह कदम न केवल एक सराहनीय पहल है, बल्कि यह जन-प्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत है। यह दर्शाता है कि सार्वजनिक पद का उपयोग जनसेवा के लिए कैसे किया जा सकता है। डीएम की इस भागीदारी ने अन्य अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों को भी कांवड़ियों की सेवा में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। यह आयोजन प्रशासनिक जवाबदेही और सामाजिक सद्भाव का एक आदर्श मॉडल है, जो यह सिद्ध करता है कि सरकार और जनता के बीच का संबंध आपसी सम्मान और सहयोग पर आधारित होना चाहिए। निष्कर्षतः, पीलीभीत के मंडी परिसर में आयोजित यह भव्य भोज और स्वागत समारोह केवल एक भोजन कार्यक्रम से कहीं अधिक था। यह आस्था, सेवा और प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक सशक्त प्रतीक था। डीएम द्वारा कांवड़ियों को भोजन परोसने की इस पहल ने समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया है। इसने साबित कर दिया कि जब प्रशासन अपने कर्तव्यों को मानवीय संवेदना के साथ निभाता है, तो वह न केवल व्यवस्था बनाए रखता है, बल्कि समाज में प्रेम और विश्वास के बंधन को भी मजबूत करता है। यह आयोजन आने वाले समय के लिए एक मिसाल बन जाएगा।