कानपुर में 60 लाख रुपये में पकड़ा गया अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का बड़ा रैकेट

कानपुर पुलिस ने एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें उत्तराखंड के एक युवक को जबरन किडनी दान कराने के लिए 60 लाख रुपये में बेचा गया था। यह गिरोह शहर के तीन बड़े अस्पतालों में अवैध रूप से संचालित हो रहा था। पुलिस की कार्रवाई के बाद इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसने समाज कल्याण के प्रति गंभीर लापरवाही को उजागर किया है।
यह रैकेट उत्तराखंड के रहने वाले पीड़ित को पहले से ही पैसों के लालच में झांसा देकर कानपुर बुलाया गया था। पुलिस की जांच में पता चला कि उसे पहले से ही अवैध व्यापार में शामिल लोगों से मिलवाया गया था। गिरोह के सरगनाओं ने गरीब और बेसहारा लोगों को target किया, उन्हें कम पैसों का लालच देकर अपने जाल में फंसाया और फिर उन्हें किडनी बेचने के लिए मजबूर किया। यह पूरी प्रक्रिया केवल पैसों के लिए की जा रही थी, जिसमें पीड़ित के स्वास्थ्य और जीवन की कोई चिंता नहीं की गई।
इस मामले में मुख्य आरोपी पीड़ित का साथी है, जिसे पैसों के लालच में बहकाया गया था। पुलिस की जांच में पता चला कि उसे पहले से ही अवैध व्यापार में शामिल लोगों से मिलवाया गया था। गिरोह के सरगनाओं ने गरीब और बेसहारा लोगों को target किया, उन्हें कम पैसों का लालच देकर अपने जाल में फंसाया और फिर उन्हें किडनी बेचने के लिए मजबूर किया। यह पूरी प्रक्रिया केवल पैसों के लिए की जा रही थी, जिसमें पीड़ित के स्वास्थ्य और जीवन की कोई चिंता नहीं की गई।
कानपुर के तीन अस्पतालों में संचालित इस रैकेट में न केवल डॉक्टर बल्कि बिचौलिए और अन्य कर्मचारी भी शामिल थे। पुलिस ने छापेमारी के दौरान मेडिकल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। यह पता चला है कि इन अस्पतालों में अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रियाएं की जा रही थीं, जो मेडिकल एथिक्स और कानून के गंभीर उल्लंघन के समान है।
कानपुर पुलिस की विशेष टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की है। जांच के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें रैकेट के मुख्य सूत्रधार भी शामिल हैं। पुलिस अब पूरे गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है और इस अवैध व्यापार में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। यह घटना कानपुर के लिए एक बड़ा कलंक है और अवैध व्यापार के खिलाफ सख्त कानून की आवश्यकता पर फिर से जोर देती है।
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