जेवर एयरपोर्ट के लिए उत्तर प्रदेश में राजनीतिक श्रेय की होड़: सपा के बाद मायावती की एंट्री, सपने का सवाल

उत्तर प्रदेश में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की परियोजना, जो राज्य के विकास का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है, अब राजनीतिक श्रेय की एक नई जंग का केंद्र बन गई है। यह परियोजना, जिसे पहले समाजवादी पार्टी (एस पी) सरकार के कार्यकाल में एक प्रमुख पहल के रूप में पेश किया गया था, अब बहुजन समाज पार्टी (बी एस पी) की प्रमुख मायावती के नेतृत्व में एक नए राजनीतिक मोर्चे का सामना कर रही है। यह राजनीतिक खींचतान इस बात पर केंद्रित है कि इस महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना के पीछे किसका सपना और प्रयास वास्तव में है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वर्ष 2012 में सत्ता में आने के बाद जेवर एयरपोर्ट की आधारशिला रखी थी और इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एन सी आर) के लिए एक विश्व स्तरीय हवाई अड्डे के रूप में परिकल्पित किया था। राज्य के विकास के लिए यह एक प्रमुख वादा था। हालांकि, परियोजना के कार्यान्वयन में काफी देरी हुई है। अब जब काम फिर से तेज होने लगा है, तो सपा नेतृत्व ने अपनी सरकार की भूमिका को उजागर करने के लिए प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। पार्टी के नेता जनता को याद दिला रहे हैं कि यह परियोजना उनके प्रशासन की देन है।
इसके विपरीत, मायावती ने इस राजनीतिक अवसर का लाभ उठाना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश के गौतम बुध नगर जिले में स्थित इस स्थल पर सक्रिय रूप से जाकर, उन्होंने सार्वजनिक सभाएं करना शुरू कर दिया है। अपने समर्थकों और जनता से सीधे संवाद करते हुए, मायावती ने सूक्ष्म रूप से परियोजना की अवधारणा को अपनी पार्टी के वैचारिक ढांचे से जोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने संकेत दिया कि यह केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सपना है जो समाज के सभी वर्गों को सशक्त बनाने के उनके दृष्टिकोण के अनुरूप है। यह कदम सपा के उस विमर्श को सीधी चुनौती है, जिसमें वे इस परियोजना को विशेष रूप से अपनी सरकार की विरासत के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
इस "क्रेडिट की जंग" ने राज्य की राजनीति में एक नया आयाम जोड़ दिया है। यह राजनीतिक बयानबाजी अब केवल चुनावों तक सीमित नहीं है; यह सार्वजनिक मंचों और मीडिया के माध्यम से लड़ी जा रही है। सपा के नेतृत्व वाली सरकार पर परियोजना को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया जा रहा है, जबकि मायावती की बी एस पी जनता की नजरों में सपा के प्रभाव को कम करने के लिए इस परियोजना को अपने राजनीतिक एजेंडे में शामिल करने की कोशिश कर रही है। यह प्रतिद्वंद्विता उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य की एक पुरानी विशेषता है, जहाँ प्रमुख विकास परियोजनाएं अक्सर प्रतिद्वंद्वी दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मैदान बन जाती हैं।
जेवर एयरपोर्ट के लिए, यह राजनीतिक खींचतान अनिश्चितता पैदा कर रही है। जहाँ एक ओर इस परियोजना को एक महत्वपूर्ण आर्थिक और परिवहन केंद्र के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक खींचतान के कारण इसके कार्यान्वयन की समयसीमा और स्पष्टता प्रभावित हो रही है। यह घटना इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे बड़े पैमाने के राज्य-स्तरीय विकास कार्य अक्सर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के जाल में फंस जाते हैं। जेवर एयरपोर्ट का अंतिम भाग्य और भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि आगामी समय में राजनीतिक विमर्श कैसे विकसित होते हैं और जनता तथा सरकार के भीतर इन प्रतिस्पर्धी दावों को कैसे प्रबंधित किया जाता है।
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