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रायबरेली में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप में डलमऊ SDM के कार्यालय पर प्रदर्शन

टीम पुलिस प्रहरी
2 सप्ताह पहले
रायबरेली में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप में डलमऊ SDM के कार्यालय पर प्रदर्शन

रायबरेली के डलमऊ में आज एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल देखने को मिली। स्थानीय निवासियों के एक समूह ने जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय पर प्रदर्शन किया, जिसमें डलमऊ के सब-डिविज़नल मजिस्ट्रेट (SDM) पर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप लगाया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि SDM द्वारा की गई कथित मनमानी से स्थानीय जनता को परेशानी हो रही है और कानून का शासन खतरे में है। प्रदर्शन की मुख्य वजह एक खास सरकारी भूमि का टुकड़ा है, जिसके बारे में उनका दावा है कि वह अवैध रूप से किसी निजी व्यक्ति के नाम कर दी गई है, जबकि वह भूमि स्कूल या अस्पताल जैसी ज़रूरी सेवाओं के लिए आरक्षित थी।

आरोपों के अनुसार, यह मामला कई सालों से बलपूर्वक कब्जाए गए भूमि के टुकड़े से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने दस्तावेज़ों और गवाहों के साथ यह सबूत पेश किए कि यह सरकारी संपत्ति, जो राजस्व अभिलेखों में दर्ज है, अवैध रूप से किसी निजी व्यक्ति के नाम कर दी गई है। जब इस मामले पर SDM से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया और कहा कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और मामले की जाँच की जा रही है। उन्होंने कहा कि उनके पद का उपयोग किसी भी अवैध गतिविधि के लिए नहीं किया जा रहा है।

यह प्रदर्शन केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं है, बल्कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार की नीतियों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। प्रशासन के अंदर भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि एक निष्पक्ष जाँच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक भरोसा बहाल करना मुश्किल है। यह घटना उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में हो रहे भूमि विवादों और अवैध कब्जों के मामलों को दर्शाती है, जहाँ आम नागरिकों का न्याय के लिए प्रशासन के पास जाना एक आम बात होती जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, प्रशासन ने SDM को उनके कार्यालय पर बुलाकर चर्चा की है। साथ ही, एक उच्च स्तरीय जाँच टीम का गठन भी किया गया है। स्थानीय निवासियों की मुख्य मांग है कि SDM के खिलाफ तत्काल कार्रवाई हो और कब्जा की गई सरकारी भूमि को तुरंत वापस दिलाया जाए। यह मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, और आगामी दिनों में इसकी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी नज़र रहेगी।

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