बनारस में फर्जी एंटी करप्शन गिरोह का भंडाफोड़, पुलिस ने तीन को किया गिरफ्तार

बनारस के पुलिस ने एक बड़े फर्जी एंटी करप्शन गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह आम जनता को ठगने के लिए खुद को सरकारी अधिकारी बताकर काम कर रहा था। पुलिस ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश किया है और तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह घटना शहर में हड़कंप मचा दिया है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गिरोह का काम करने का तरीका बहुत ही चालाकी भरा था। वे लोगों से कहते थे कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं और शिकायत दर्ज करने पर जांच शुरू कर देंगे। एक खास महिला सहित तीन सदस्यों की गिरफ्तारी से पूरे गिरोह का राज खुल गया। पुलिस को जानकारी मिली थी कि यह लोग बुजुर्गों और आम नागरिकों को अपने झांसे में फंसाते थे और उनसे मोटी रकम वसूलते थे। उन्होंने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए पहले मामूली शुल्क लेना शुरू किया और बाद में बड़ी रकम की मांग करने लगे।
गिरफ्तार किए गए लोगों में रामेश्वर प्रसाद, आशा देवी और रमेश कुमार शामिल हैं। रामेश्वर प्रसाद और रमेश कुमार स्थानीय निवासी हैं, जबकि आशा देवी की पहचान एक महिला के रूप में हुई है जो इस पूरे काम की मुख्य सूत्रधार थी। पुलिस की जांच में पता चला है कि वे अपने काम को चलाने के लिए फर्जी दस्तवेजों और सरकारी लेटरहेड का इस्तेमाल करते थे। आशा देवी की भूमिका यह समझने में महत्वपूर्ण रही कि वे लोगों के साथ कैसे तालमेल बिठाती थीं और उनकी शिकायतें कैसे दर्ज करवाती थीं।
जांच के दौरान पुलिस को उनके पास से कई आपत्तिजनक सामान मिले, जिनमें फर्जी नोट, लेजर बुक और अवैध स्टैम्प शामिल थे। यह लोग लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए पहले मामूली शुल्क लेते थे और बाद में बड़ी रकम की मांग करते थे। पुलिस का कहना है कि यह एक सुनियोजित योजना थी जिससे वे अपने अवैध कारोबार को चला रहे थे।
पुलिस ने इस पूरे मामले में धारा 420 (धोखाधड़ी) और अन्य धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि ऐसे ठगों को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ा जाएगा। जांच जारी है और जल्द ही इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की भी गिरफ्तारी की जा सकती है। बनारस पुलिस जनता से अपील करती है कि वे ऐसे झांसे में न आएं और किसी भी शिकायत के लिए आधिकारिक माध्यमों का ही उपयोग करें।
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