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गैस की किल्लत ने प्रदेश को घेरा, कानपुर में हालत 'कोविड काल' जैसी

टीम पुलिस प्रहरी
3 सप्ताह पहले
गैस की किल्लत ने प्रदेश को घेरा, कानपुर में हालत 'कोविड काल' जैसी

उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में, विशेष रूप से कानपुर जैसे प्रमुख शहरों में, घरेलू रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत ने आम जनता को परेशान कर दिया है। इस संकट के कारण लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है और उन्हें बिना गैस के रहने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

कानपुर में तो यह स्थिति और भी भयावह हो गई है। शहर के विभिन्न मोहल्लों में गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कई घरों में खाली एलपीजी सिलेंडर एक आम दृश्य बन गए हैं, जिससे परिवार खाना पकाने के लिए वैकल्पिक ईंधन खोजने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी खराब है कि इसे 'कोविड काल' जैसा बताया जा रहा है। लोग panic buying कर रहे हैं और कालाबाजारी में भी वृद्धि देखी जा रही है। सिलेंडर के लिए परेशान परिवारों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाती हैं।

यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है। विपक्ष के नेता राज्य सरकार पर इस संकट को संभालने में विफल रहने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में व्यवधान के लिए सरकार को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। हालांकि, सत्ताधारी दल ने अभी तक कोई ठोस बयान जारी नहीं किया है।

घरेलू रसोई गैस की अनुपलब्धता ने विशेष रूप से मध्यम और निम्न-आय वर्ग के परिवारों को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई लोग अब लकड़ी और कोयले जैसे पारंपरिक ईंधन का सहारा ले रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी पैदा हो सकते हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकला है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। जब तक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से बहाल नहीं हो जाती, तब तक इस संकट के बने रहने की आशंका है। यह घटना राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह न केवल एक आर्थिक मुद्दा है बल्कि एक सामाजिक और राजनीतिक संकट भी है। जनता की परेशानी को कम करने के लिए सरकार की त्वरित कार्रवाई की अब प्रतीक्षा है।

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