उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती परीक्षा में विवाद: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जातियों पर टिप्पणी बर्दाश्त न करने की दी चेतावनी

उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती परीक्षा के दौरान एक बड़ा विवाद उत्पन्न हो गया है। इस परीक्षा में एक विशेष प्रश्न या विकल्प को लेकर उम्मीदवारों के बीच असंतोष व्याप्त है। इस मामले पर राज्य सरकार की ओर से कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाली किसी भी प्रकार की जातियों पर आधारित टिप्पणी या प्रश्न सहन नहीं किए जाएंगे।
यह विवाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा आयोजित दरोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र से जुड़ा है। कुछ उम्मीदवारों का आरोप है कि एक प्रश्न या विकल्प, जिसका उत्तर 'पंडित' से संबंधित था, ने उन्हें असहज कर दिया और उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत किया। इस कथित पक्षपात के कारण सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और अभ्यर्थियों में आक्रोश फैल गया, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े होने लगे।
इस पूरे प्रकरण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी। यदि परीक्षा में ऐसा कोई प्रश्न या विकल्प पाया जाता है, तो संबंधित कार्रवाई की जाएगी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाएगी।" उन्होंने दोहराया कि राज्य में शांति और सौहार्द बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इसके बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की संज्ञान लेते हुए एक समीक्षा समिति गठित की है। आयोग के अधिकारियों से कहा गया है कि वे प्रश्न पत्र की बारीकी से जांच करें ताकि किसी भी त्रुटि या पक्षपात का पता लगाया जा सके। सरकार ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे इस मामले में अफवाहों या सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से प्रभावित न हों।
दरोगा भर्ती परीक्षा उत्तर प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। ऐसे विवाद न केवल उम्मीदवारों के करियर को प्रभावित करते हैं, बल्कि सार्वजनिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कड़ा संदेश है कि राज्य प्रशासन किसी भी प्रकार के भेदभाव के विरुद्ध शून्य सहनशीलता का दृष्टिकोण अपनाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भविष्य में होने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षाएं निष्पक्ष और पारदर्शी हों।
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