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दिव्यांगजन के लिए 8 साल का भूमि संघर्ष: कन्नौज का दिव्यांग व्यक्ति राज्य सरकार से मांग रहा है न्याय

टीम पुलिस प्रहरी
3 सप्ताह पहले
दिव्यांगजन के लिए 8 साल का भूमि संघर्ष: कन्नौज का दिव्यांग व्यक्ति राज्य सरकार से मांग रहा है न्याय

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के एक दिव्यांग व्यक्ति ने पिछले आठ वर्षों से अपनी भूमि की तलाश में भटकते हुए राज्य सरकार से न्याय की गुहार लगाई है। यह घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि दिव्यांग व्यक्ति का परिवार सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहा है, जबकि वह व्यक्ति स्वयं को न्याय दिलाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा है।

दिव्यांगजन की पहचान केवल 32 वर्षीय रामेश्वर प्रसाद के रूप में हुई है, जो कन्नौज के एक गांव के रहने वाले हैं। वर्ष 2015 में एक सड़क दुर्घटना में उनके दोनों पैर कट गए थे, जिसके बाद उन्हें दिव्यांग घोषित कर दिया गया। इस दुर्घटना के बाद उनकी स्थिति और खराब हो गई, और उन्हें सरकारी सहायता तो मिली, लेकिन उनकी मुख्य समस्या भूमि का विवाद थी।

रामेश्वर प्रसाद के अनुसार, उनके पास जो भूमि थी, वह वर्ष 2012 में उनके पिता के नाम पर दर्ज थी। लेकिन वर्ष 2015 में उनकी मृत्यु के बाद, यह भूमि उनके नाम पर हस्तांतरित नहीं हो सकी। इसके बाद एक रिश्तेदार ने अवैध रूप से इस भूमि पर कब्जा कर लिया और रामेश्वर प्रसाद को बेदखल कर दिया। जब उन्होंने अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग करने का प्रयास किया, तो उन्हें विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़े।

इस मामले में स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ महीने पहले, कन्नौज के जिला प्रशासन ने भूमि विवाद को सुलझाने के लिए एक समिति का गठन किया था, लेकिन समिति की रिपोर्ट के अनुसार, रामेश्वर प्रसाद के पास अभी भी कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है जो उनकी भूमि पर उनके दावे को सिद्ध कर सके।

सामाजिक न्याय और दिव्यांग कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की जांच की जा रही है और यदि सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो विभाग उन्हें मुआवजा दिलाने में सहायता करेगा। इसके साथ ही, विभाग ने यह भी कहा है कि यदि आवश्यक हो, तो विभाग की ओर से कानूनी सहायता भी प्रदान की जाएगी।

इस मामले में अब तक कुल 8 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन रामेश्वर प्रसाद का परिवार अभी भी अनिश्चितता की स्थिति में है। उनके परिवार के सदस्य स्थानीय मीडिया से संपर्क कर सरकार से उनकी मदद की गुहार लगा रहे हैं।

इस मामले में अब राज्य सरकार द्वारा हस्तक्षेप की मांग की जा रही है, क्योंकि यह एक दिव्यांग व्यक्ति का मामला है जो अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। कन्नौज के स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि सरकार इस मामले में जल्द निर्णय लेती है, तो यह पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल होगी।

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