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श्री गौ सुक्तम ( ऋग्वेद)

टीम पुलिस प्रहरी
3 सप्ताह पहले
श्री गौ सुक्तम ( ऋग्वेद)

॥ श्री गौ सूक्तम् (ऋग्वेद) ॥
१. माता रुद्राणां दुहिता वसूनां स्वसादित्यानां अमृतस्य नाभिः। प्र नु वोचं चिकितुषे जनाय मा गामनागामदितिं वधिष्ट ॥ अनुवाद: गाय ग्यारह रुद्रों की माता, आठ वसुओं की पुत्री, बारह आदित्यों की बहन और अमृत का खजाना है। प्रत्येक विवेकशील मनुष्य को इस निष्पाप और दिव्य अदिति (गौ माता) की रक्षा करनी चाहिए, उनका वध कभी न करें।

२. आ गावो अग्मन्नुत भद्रमक्रन्त्सीदन्तु गोष्ठे रणयन्त्वस्मे। प्रजावतीः पुरुरूपा इह स्युुरिन्द्राय पूर्वीरुषसो दुहानाः ॥ अनुवाद: गौएँ हमारे पास आएं और हमारा कल्याण करें। वे हमारी गौशालाओं में प्रसन्नतापूर्वक निवास करें। वे अनेक रूपों वाली और संतानों वाली हों और देवताओं के लिए अमृत तुल्य दूध प्रदान करें।

३. इन्द्रो यज्वने पृणक्ति न स्वं मुषायति। भूयोभूयो रयिरिद् दधाति अविन्ने देवांशे श्रद्धया ददाति ॥ अनुवाद: जो व्यक्ति गौ सेवा और यज्ञ करता है, इन्द्रदेव उसे समृद्ध करते हैं। उसकी संपत्ति कभी कम नहीं होती। वह निरंतर ऐश्वर्य प्राप्त करता है और श्रद्धापूर्वक दान करने से देवताओं का कृपापात्र बनता है।

४. न ता नशन्ति न दभाति तस्करो नासामामित्रो व्यथिरा दधर्षति। देवांश्र याभिर्यजते ददाति च ज्योगिताभिः सचते गोपतिः सह ॥ अनुवाद: ये गौएँ कभी नष्ट न हों, चोर इन्हें न चुराएं और कोई शत्रु इन्हें कष्ट न पहुँचाए। जो गौस्वामी इन गौओं के माध्यम से पूजन और दान करता है, वह उनके साथ लंबे समय तक सुखी रहता है।

५. न ता अर्वा रेणुककाटो अश्नुते न संस्कृतत्रमुप यन्ति ता अभि। उरुगायमभयन्तस्य ता अनु गावो मर्तस्य वि चरन्ति गोष्ठम् ॥ अनुवाद: युद्ध की धूल उन तक न पहुँचे और वे कभी वधशाला न जाएँ। वे गौएँ निर्भय होकर विस्तृत चरागाहों और गौशालाओं में विचरण करें।

६. गावो भगो गाव इन्द्रो मे अच्छा गावो सोमस्य प्रथमस्य भक्षः। इमा या गावः स जनास इन्द्र इच्छामीद्धृदा मनसा चिदिन्द्रम् ॥ अनुवाद: गौएँ ही मेरा सौभाग्य और ऐश्वर्य हैं। यज्ञ के सोम का प्रथम अंश गौ-दुग्ध ही है। हे मनुष्यों! ये गौएँ साक्षात इन्द्र का स्वरूप हैं, मैं पूर्ण श्रद्धा से इन्हीं की शरण चाहता हूँ।

७. यूयं गावो मेदयथा कृशं चिदश्रीरं चित्कृणुथा सुप्रतीकम्। भद्रं गृहं कृणुथ भद्रवाचो बृहद्वो वय उच्यते सभासु ॥ अनुवाद: हे गौ माता! आप दुर्बल को पुष्ट और तेजहीन को कांतिवान बना देती हैं। आपकी उपस्थिति से घर मंगलकारी बनता है। आपकी महिमा का गान श्रेष्ठ सभाओं में किया जाता है।

८. प्रजावतीः सूयवस ऋशन्तीः शुद्धा अपः सुप्रपाणे पिबन्तीः। मा व स्तेन ईशत माघशंसः परि वो हेति रुदस्य वृज्याः ॥ अनुवाद: आप उत्तम घास खाकर पुष्ट हों और शुद्ध जल का पान करें। आप चोरों और हिंसक पशुओं से सुरक्षित रहें। भगवान रुद्र का शस्त्र आपकी सदैव रक्षा करे।
🙏जय गौ माता 🙏
(आचार्य कश्यप)
परामानसिक एवं सूक्ष्म विज्ञान विशेषज्ञ

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