वैवाहिक जीवन में मुख्य रूप से आने वाली अडचनों का मुख्य कारण क्या है

*वैदिक ज्योतिष में वैवाहिक जीवन का सुख और उसमें आने वाली बाधाएं मुख्य रूप से कुंडली के 7वें भाव (Seventh House) और कुछ विशिष्ट ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करती हैं।*
जब इन पर पाप ग्रहों का प्रभाव पड़ता है, तो कलह और तनाव की स्थिति पैदा होती है।
आइए इसे विस्तार से समझने के लिए कुछ मुख्य बिंदुओं पर नजर डालते हैं:
🌌 मुख्य उत्तरदायी ग्रह- -
*मंगल (Mars):* यदि कुंडली में मंगल दोष हो, तो यह स्वभाव में उग्रता और क्रोध पैदा करता है, जिससे जीवनसाथी के साथ विवाद बढ़ते हैं। ⚔️
*शनि (Saturn):* शनि अलगाव और भावनात्मक दूरी का कारक है। इसकी दृष्टि 7वें भाव पर होने से आपसी तालमेल में कमी आती है। ❄️
*राहू-केतु (Rahu-Ketu):* ये ग्रह भ्रम, शक और अचानक होने वाले झगड़ों का कारण बनते हैं।
राहू अक्सर संवादहीनता या गलतफहमी पैदा करता है। 🌫️
*शुक्र (Venus):* पुरुषों की कुंडली में शुक्र वैवाहिक सुख का कारक है। यदि शुक्र कमजोर या पीड़ित हो, तो प्रेम में कमी आती है। 💖
*गुरु (Jupiter):* स्त्रियों की कुंडली में गुरु पति का कारक है। गुरु का अशुभ होना वैवाहिक अस्थिरता दे सकता है। 🏛️
📉 *ज्योतिषीय कारण*
*7वें भाव का स्वामी (Lord of 7th House):* यदि 7वें घर का स्वामी 6ठे (विवाद), 8वें (बाधा) या 12वें (हानि) भाव में बैठा हो।
*क्रूर ग्रहों की युति:* यदि सूर्य, मंगल या शनि जैसे ग्रह 7वें भाव में एक साथ हों।
*नवांश कुंडली (Navamsha - D9 Chart):* मुख्य लग्न कुंडली के साथ-साथ नवांश कुंडली का अध्ययन भी अनिवार्य है, क्योंकि यह विवाह की सूक्ष्म स्थिति को दर्शाता है।
(डॉ कश्यप)
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