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विश्व रेडियो दिवस: बदलते दौर में रेडियो की प्रासंगिकता पर एक समीक्षात्मक दृष्टि

टीम पुलिस प्रहरी
1 महीने पहले
विश्व रेडियो दिवस: बदलते दौर में रेडियो की प्रासंगिकता पर एक समीक्षात्मक दृष्टि

विश्व रेडियो दिवस: बदलते दौर में रेडियो की प्रासंगिकता पर एक समीक्षात्मक दृष्टि
हर वर्ष 13 फरवरी को विश्व भर में “विश्व रेडियो दिवस” मनाया जाता है। यह दिन रेडियो की ऐतिहासिक भूमिका, उसकी सामाजिक उपयोगिता और लोकतांत्रिक संवाद में उसके योगदान को रेखांकित करता है। यूनेस्को द्वारा 2011 में घोषित यह दिवस हमें याद दिलाता है कि तकनीक के तेज़ी से बदलते युग में भी रेडियो आज प्रासंगिक, सुलभ और प्रभावशाली माध्यम बना हुआ है।
रेडियो की सबसे बड़ी ताकत उसकी पहुंच है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में, जहां आज भी दूरदराज़ के क्षेत्रों में इंटरनेट और टीवी की सीमित उपलब्धता है, वहां रेडियो सूचना का सशक्त साधन है। प्राकृतिक आपदाओं, महामारी या किसी भी आपातकालीन स्थिति में रेडियो ने हमेशा विश्वसनीय संचार माध्यम के रूप में अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। कम लागत, सरल तकनीक और व्यापक पहुंच के कारण यह समाज के अंतिम व्यक्ति तक सूचना पहुंचाने में सक्षम है।
रेडियो केवल समाचारों तक सीमित नहीं है; यह शिक्षा, संस्कृति, संगीत और जन-जागरूकता का भी माध्यम है। आकाशवाणी और सामुदायिक रेडियो स्टेशनों ने ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और कृषि संबंधी जानकारी के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सामुदायिक रेडियो स्थानीय भाषा और बोली में प्रसारण कर लोगों को अपनी आवाज़ उठाने का मंच देता है, जिससे लोकतांत्रिक सहभागिता मजबूत होती है।
हालांकि, डिजिटल क्रांति के दौर में रेडियो के सामने चुनौतियां भी हैं। इंटरनेट, पॉडकास्ट, सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव ने पारंपरिक रेडियो श्रोताओं की संख्या को प्रभावित किया है। युवा पीढ़ी मोबाइल आधारित कंटेंट की ओर अधिक आकर्षित हो रही है। ऐसे में रेडियो को अपनी प्रस्तुति शैली, विषय-वस्तु और तकनीकी स्वरूप में नवाचार लाने की आवश्यकता है। एफएम चैनलों और ऑनलाइन रेडियो ने इस दिशा में सकारात्मक प्रयास किए हैं।
समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो रेडियो की विश्वसनीयता उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। जहां सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों का खतरा बना रहता है, वहीं रेडियो अपेक्षाकृत अधिक जिम्मेदार और प्रमाणिक माध्यम माना जाता है। फिर भी, उसे निष्पक्षता, विविधता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल्यों को और सुदृढ़ करने की जरूरत है।
आज आवश्यकता है कि रेडियो को केवल पुराने माध्यम के रूप में न देखा जाए, बल्कि उसे डिजिटल तकनीक के साथ समन्वित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। पॉडकास्ट, वेब रेडियो और मोबाइल एप्स के माध्यम से रेडियो की पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ाए जा सकते हैं।
अंततः, विश्व रेडियो दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि सूचना के इस पारंपरिक माध्यम को हम कैसे अधिक समावेशी, आधुनिक और प्रभावी बना सकते हैं। रेडियो ने अतीत में समाज को जोड़ा है, वर्तमान में दिशा दी है और भविष्य में भी संवाद की यह धारा निरंतर बहती रहे—यही इस दिवस का मूल संदेश है।

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