पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों को सिखाए ब्रांडिंग, मार्केटिंग और ऑनलाइन कारोबार के गुर; एआई से उत्पादों की डिजाइनिंग का मिला प्रशिक्षण
कन्नौज, 14 अक्टूबर। अब पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़कर कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की तैयारी है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों को अपने उत्पादों की ब्रांडिंग, मार्केटिंग और ऑनलाइन बिक्री के गुर सिखाए गए। बुधवार को राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, बेहरीन, कन्नौज में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में 97 शिल्पकारों ने प्रतिभाग किया। उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया के जरिए अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने की जानकारी दी गई।
भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर की ओर से आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को बाजार की नई जरूरतों से जोड़ना और उनके उत्पादों की पहुंच बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में खिलौने एवं गुड़िया बनाने वाले कारीगरों के साथ सोनार, लोहार, बढ़ई, मोची, धोबी, नाई और दर्जी सहित विभिन्न व्यवसायों से जुड़े शिल्पकार शामिल हुए।
एमएसएमई-विकास कार्यालय के सहायक निदेशक नीरज कुमार ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और मंत्रालय की अन्य योजनाओं की जानकारी देते हुए कारीगरों को स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने उद्यम रजिस्ट्रेशन और उद्यम असिस्ट के बारे में भी बताया।
जिला उद्योग केंद्र, कन्नौज के सहायक प्रबंधक घनश्याम राठौर ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना-2.0 और एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। जिला प्रबंधक संजय गुप्ता और बैंक ऑफ इंडिया के अग्रणी जिला प्रबंधक रणजीत सिंह ने ऋण एवं वित्तीय सहायता से जुड़ी योजनाओं के बारे में बताया।
वॉलमार्ट वृद्धि/फ्लिपकार्ट के जोनल मोबिलाइजेशन मैनेजर अंशुल गुप्ता ने एआई और ई-कॉमर्स के जरिए कारोबार बढ़ाने की प्रक्रिया समझाई। बिजनेस कंसल्टेंट डॉ. संजय भारती ने लाइव डेमो के माध्यम से उत्पादों की डिजाइनिंग, विज्ञापन तैयार करने और सोशल मीडिया मार्केटिंग के व्यावहारिक तरीके बताए। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक शिशिर मिश्रा ने डिजिटल भुगतान और डाकघर की योजनाओं की जानकारी दी। डीपीएमयू, कन्नौज की आकांक्षा यादव ने प्रशिक्षण संबंधी जानकारी साझा की।
कार्यक्रम का संचालन एमएसएमई-विकास कार्यालय के यंग प्रोफेशनल रजत कटियार ने किया। उन्होंने शिल्पकारों की समस्याएं सुनकर उनके समाधान का प्रयास किया और उन्हें योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। अंत में आकांक्षा यादव ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया।
कार्यक्रम ने पारंपरिक हुनर को डिजिटल बाजार से जोड़ने और कारीगरों को अपने उत्पादों की बेहतर पहचान बनाने के लिए नई संभावनाओं से परिचित कराया।

