लखनऊ, 21 अगस्त 2026। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर तथा पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI), लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों के लिए वेण्डर विकास कार्यक्रम-2026” का शुक्रवार को समापन हुआ। कार्यक्रम में 200 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों, औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों तथा विभिन्न सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन, शशि भूषण लाल सुशील, IAS मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान एमएसएमई के लिए वित्तीय सहायता, सरकारी खरीद, GeM पोर्टल, गुणवत्ता मानकों और बाजार विस्तार से जुड़े अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई।

एमएसएमई-डीएफओ, कानपुर के निदेशक के.के. वर्मा, IEDS ने स्वागत संबोधन में वेण्डर डेवलपमेंट प्रोग्राम की उपयोगिता बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम एमएसएमई इकाइयों को बड़े उद्यमों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों तथा सरकारी खरीद व्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य अतिथि शशि भूषण लाल सुशील ने कहा कि “CM YUVA योजना” का उद्देश्य केवल ऋण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को नए कारोबार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने बैंकों के माध्यम से योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार और जागरूकता पर जोर दिया, ताकि अधिक से अधिक युवा इसका लाभ उठा सकें।

उन्होंने कहा कि एमएसएमई, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और व्यक्तिगत उद्यमियों को बड़े उद्योगों, संस्थागत खरीदारों और सरकारी खरीद से जोड़ना आवश्यक है। इसके लिए GeM (Government e-Marketplace) के माध्यम से सरकारी खरीद की संभावनाओं और एमएसएमई तथा SC/ST उद्यमियों के लिए उपलब्ध खरीद प्रावधानों की जानकारी उद्यमियों तक पहुंचाई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि नए उद्यमियों के लिए ऑनलाइन मार्केटिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म ग्राहकों तक पहुंच बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं। “सिर्फ ऋण देना पर्याप्त नहीं है—वित्त से उत्पादन, उत्पादन से बाजार, बाजार से ऑर्डर और अंततः ऑर्डर से स्थायी रोजगार और उद्यम की वृद्धि तक एक पूरी कड़ी तैयार करनी होगी।”

कार्यक्रम के दौरान प्रमुख सचिव ने उपस्थित एमएसएमई उद्यमियों और वेण्डरों से संवाद कर उनकी समस्याएं, आवश्यकताएं एवं सुझाव सुने। उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के साथ-साथ गुणवत्ता सुधार, डिजिटल मार्केटिंग, सरकारी खरीद प्रक्रिया और नए बाजारों से जुड़ने की दिशा में सक्रिय प्रयास करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, औद्योगिक संगठनों तथा एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम का उद्देश्य सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों को बड़े बाजार, सरकारी खरीद और संस्थागत अवसरों से जोड़कर उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करना रहा।