लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में एक अत्यंत चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां एक छात्रा लिफ्ट में फंस गई। इस घटना के दौरान छात्रा लगभग 45 मिनट तक लिफ्ट के अंदर ही कैद रही, जिससे वहां मौजूद छात्रों और कर्मचारियों के बीच भारी हड़कंप मच गया। इस अप्रिय घटना के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही बरतने का सीधा आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि परिसर में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव में लगातार हो रही अनदेखी इस तरह की दुर्घटनाओं को न्यौता दे रही है। इस घटना ने विश्वविद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, घटना उस समय घटी जब छात्रा विश्वविद्यालय परिसर के भीतर स्थित एक भवन से गुजर रही थी। अचानक लिफ्ट खराब हो गई और वह अंदर फंस गई। शुरुआत में छात्रा ने खुद ही लिफ्ट खोलने का प्रयास किया, लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिली। लिफ्ट के अंदर अंधेरा छाने और हवा का प्रवाह कम होने के कारण छात्रा की घबराहट काफी बढ़ गई। उसने तुरंत बाहर निकलने के लिए मदद की गुहार लगाई, लेकिन काफी समय तक कोई भी उसकी आवाज सुनने या सहायता के लिए वहां नहीं पहुंचा। यह देरी छात्रा के लिए मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से बेहद तनावपूर्ण साबित हुई। परिसर में मौजूद अन्य छात्रों ने जब इस बात का संज्ञान लिया, तब जाकर मामले में कोई हलचल देखने को मिली। लिफ्ट में फंसे रहने की पूरी अवधि के दौरान छात्रा को कई तरह की शारीरिक और मानसिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लगभग 45 मिनट तक बंद लिफ्ट के अंदर रहने के कारण उसे घुटन और घबराहट का अनुभव हुआ। हालांकि छात्रा ने धैर्य बनाए रखा और समय-समय पर मदद के लिए पुकारती रही, लेकिन बचाव कार्य में हुई देरी ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया। जब आखिरकार लिफ्ट का दरवाजा खुला, तो छात्रा किसी तरह बाहर निकलने में सफल रही। बाहर आने के बाद उसने राहत की सांस ली, लेकिन यह पूरी घटना उसके लिए एक भयानक अनुभव बनकर रह गई। इस घटना ने स्पष्ट रूप से दर्शाया है कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए परिसर में उचित तंत्र का होना कितना आवश्यक है। इस घटना के प्रकाश में आते ही विश्वविद्यालय के छात्र भारी आक्रोश में हैं। छात्रों का स्पष्ट आरोप है कि लिफ्ट की नियमित जांच और रखरखाव के प्रति प्रशासन पूरी तरह से लापरवाह रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते लिफ्ट की मरम्मत करवा ली गई होती या उचित सुरक्षा उपाय अपनाए गए होते, तो यह घटना टल सकती थी। छात्रों ने यह भी बताया कि परिसर में कई अन्य लिफ्ट और लिफ्ट जैसी सुविधाएं भी खराब हालत में हैं, जिनकी शिकायतें बार-बार की गई हैं, परंतु प्रशासन द्वारा उन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। छात्रों का यह भी मानना है कि इस तरह की घटनाओं से न केवल छात्रों के जीवन को खतरा है, बल्कि विश्वविद्यालय की छवि भी धूमिल हो रही है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। छात्रों के भारी विरोध और हंगामे को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि लिफ्ट में फंसी छात्रा को हुई असुविधा के लिए वे खेद व्यक्त करते हैं और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि परिसर में मौजूद सभी लिफ्ट और लिफ्ट सुविधाओं का तत्काल प्रभाव से तकनीकी निरीक्षण कराया जाएगा। इसके साथ ही, आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एक बेहतर और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने की बात कही गई है। प्रशासन ने छात्रों से शांति बनाए रखने और जांच प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं और वे ठोस कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस घटना ने लखनऊ विश्वविद्यालय में बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे को एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह मामला केवल एक खराब लिफ्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों की सुरक्षा और उनके कल्याण के प्रति प्रशासन के रवैये को दर्शाता है। विश्वविद्यालय एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान है, जहां देश भर से छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। ऐसे में उनके लिए एक सुरक्षित और सुचारू वातावरण प्रदान करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन छात्रों की मांगों पर किस प्रकार अमल करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या स्थायी समाधान निकाले जाते हैं। जब तक परिसर में सुरक्षा और रखरखाव के मानकों में वास्तविक सुधार नहीं होता, तब तक छात्रों का असंतोष बना रहने की पूरी संभावना है।