उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस बार मानसून ने अपनी रिकॉर्ड तोड़ बारिश से शहर की व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी मूसलाधार बारिश ने न केवल शहर की सड़कों को जलमग्न कर दिया है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को भी अस्त-व्यस्त कर दिया है। विशेष रूप से जानकीपुरम क्षेत्र में स्थिति सबसे भयावह है, जहां घरों के अंदर तक पानी घुसने से लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जानकीपुरम में बारिश का पानी घरों के भीतर तक पहुंच गया है, जिससे लोगों के बेड और किचन पूरी तरह डूब चुके हैं। यह दृश्य देखकर लोगों के होश उड़ गए हैं। कई घरों में पानी का स्तर इतना बढ़ गया है कि लोगों को अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि पानी के साथ-साथ कीचड़ और कचरा भी जमा हो गया है, जिससे घर के अंदर रहना भी मुश्किल हो गया है। जिन लोगों के पास ऊंचे स्थान पर फर्नीचर था, वे भी अब पानी की चपेट में आ चुके हैं। सड़कों पर पानी भरने से यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। कई मुख्य सड़कों पर पानी इतना गहरा है कि दोपहिया वाहन चालकों को अपनी बाइक बंद करनी पड़ रही हैं। लोग अपने वाहनों को धक्का देकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कई बार वाहन बंद हो जाने से उन्हें पैदल ही रास्ता तय करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल जानकीपुरम में है, बल्कि शहर के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिल रही है। ट्रैफिक पुलिस की ओर से कोई भी वैकल्पिक रास्ता न होने के कारण जाम की स्थिति और भी गंभीर हो गई है। नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें राहत कार्य में जुटी हुई हैं, लेकिन बारिश की तीव्रता के सामने उनकी कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं। कई क्षेत्रों में जलभराव की समस्या दशकों पुरानी है, लेकिन इस बार की बारिश ने उसे और भी बदतर बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल यही कहानी दोहराई जाती है, लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकाला गया है। नालियों की सफाई और सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि भारी बारिश में ही शहर की पोल खुलती नजर आ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को जलजनित बीमारियों से सावधान रहने की सलाह दी है। दूषित पानी के कारण डेंगू, मलेरिया और गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगाने और पानी की जांच करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर अभी दिखाई नहीं दे रहा है। आर्थिक नुकसान की बात करें तो छोटे व्यवसायों और दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को सबसे अधिक कष्ट हो रहा है। दुकानों में पानी घुसने से सामान खराब हो गया है और कई दिनों से दुकानें बंद रहने से लोगों की कमाई का साधन छिन गया है। ऑटो और टैक्सी चालकों की भी यही स्थिति है, क्योंकि वे अपने वाहनों को सुरक्षित स्थान पर खड़ा करने के लिए जगह नहीं ढूंढ पा रहे हैं। यह बारिश न केवल एक प्राकृतिक आपदा है, बल्कि शहर की अव्यवस्था का एक प्रमाण भी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घरों में ही रहें और जब तक बहुत जरूरी न हो, बाहर निकलने से बचें। आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, लेकिन बारिश की तीव्रता को देखते हुए लोगों की सहायता करना प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। लखनऊ के निवासियों के लिए यह बारिश एक सबक है कि शहर की बुनियादी संरचना को मजबूत करने की कितनी जरूरत है। जब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक हर साल शहरवासियों को ऐसी ही मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
लखनऊ में सीजन की रिकॉर्ड बारिश ने बढ़ाई मुसीबतें, जानकीपुरम के घरों में घुसा पानी, जनजीवन अस्त-व्यस्त
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