लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, जो उत्तर प्रदेश की राजधानी और प्रमुख औद्योगिक शहर कानपुर के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, वर्तमान में अपनी अत्यंत जर्जर स्थिति के कारण यात्रियों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। इस महत्वपूर्ण राजमार्ग की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि यह अपने आरंभ से लेकर अंतिम छोर तक खस्ताहाल नजर आ रही है, जिससे यह मार्ग एक सुरक्षित और तीव्र परिवहन गलियारे के बजाय एक खतरनाक चुनौती में बदल गया है। इस एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले यात्रियों को निरंतर तनाव और वाहन की क्षति का सामना करना पड़ रहा है, जिससे इस प्रमुख परियोजना की गुणवत्ता और रखरखाव पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। एक्सप्रेसवे की सतह पर भारी टूट-फूट के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। सड़क की परत उखड़ने लगी है और कई स्थानों पर डामर पूरी तरह से घिस चुका है, जिससे नीचे की बजरी और पत्थर बाहर आ गए हैं। यह असमान और ऊबड़-खाबड़ सतह वाहनों के लिए अत्यंत कष्टकारी है। जैसे ही वाहन इस पर चलते हैं, यात्रियों को हर कुछ मीटर पर झटके महसूस होते हैं, जो न केवल यात्रा को असुविधाजनक बनाता है बल्कि वाहन के सस्पेंशन सिस्टम, टायरों और एलाइनमेंट पर भी अत्यधिक दबाव डालता है। सड़क की चिकनाई की कमी के कारण वाहन चालक को अत्यधिक सावधानी बरतनी पड़ती है, जिससे यात्रा की गति धीमी हो जाती है और यात्रा में लगने वाला समय काफी बढ़ जाता है। खस्ताहाल सतह के साथ-साथ, पूरे एक्सप्रेसवे पर बड़े और गहरे गड्ढों की भरमार है। ये गड्ढे केवल छोटे गड्ढे नहीं हैं, बल्कि कई स्थानों पर ये इतने चौड़े और गहरे हैं कि इनमें से वाहन को निकालने के लिए विशेष प्रयास की आवश्यकता होती है। ये गड्ढे सड़क पर खतरनाक स्पीड ब्रेकर की तरह कार्य करते हैं, जिससे वाहन के नियंत्रण खोने का निरंतर खतरा बना रहता है, विशेषकर तेज गति से चलने वाले वाहनों के लिए। दोपहिया वाहनों और कारों के लिए, इन गड्ढों से टकराने पर टायर फटने, वाहन के पलटने या गंभीर दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब ये गड्ढे पानी से भर जाते हैं और उनकी वास्तविक गहराई दिखाई नहीं देती, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इस एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले दैनिक यात्रियों के लिए यह स्थिति मानसिक और शारीरिक तनाव का एक बड़ा स्रोत है। लखनऊ और कानपुर के बीच सफर करने वाले हजारों यात्रियों को अब इस मार्ग पर चलते समय अत्यधिक सतर्क रहना पड़ता है। सड़क की हर असमानता पर नज़र रखना और अचानक आने वाले गड्ढों से बचने के लिए लगातार ब्रेक लगाना उनकी यात्रा को थकाऊ और तनावपूर्ण बना देता है। कई यात्री बताते हैं कि इस सड़क पर वाहन चलाने के कारण उनकी कार की मरम्मत पर काफी पैसा खर्च हो रहा है। वह एक्सप्रेसवे, जिसे समय और धन की बचत के लिए बनाया गया था, अब वाहन रखरखाव के खर्चों और यात्रा के दौरान होने वाली चिंता के कारण उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। सड़क की इस दयनीय स्थिति के कारण एक्सप्रेसवे की सुरक्षा से समझौता हो रहा है। हादसों का खतरा लगातार बना रहता है, विशेषकर रात के समय या खराब दृश्यता के दौरान। गड्ढों के कारण वाहन चालक अचानक नियंत्रण खो सकते हैं, जिससे पीछे से आने वाले वाहनों से टक्कर हो सकती है। यह न केवल यात्रियों के जीवन को जोखिम में डालता है, बल्कि सड़क पर जाम की स्थिति भी पैदा करता है। आपातकालीन सेवाओं के लिए भी इस खराब सड़क पर चलना कठिन हो जाता है, जिससे दुर्घटना की स्थिति में त्वरित सहायता मिलने में देरी हो सकती है। एक्सप्रेसवे की सुरक्षा से जुड़ी यह लापरवाही किसी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है, जिसके परिणाम अत्यंत दुखद हो सकते हैं। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की वर्तमान स्थिति राज्य की बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाती है। यह एक महत्वपूर्ण और उच्च लागत वाली परियोजना है, फिर भी यह अपनी उपयोगिता खोती जा रही है। यात्रियों में इस सड़क के प्रति गहरा आक्रोश है और वे इस पर तत्काल ध्यान देने की मांग कर रहे हैं। एक्सप्रेसवे को सुरक्षित और उपयोगी बनाए रखने के लिए इसमें तत्काल और व्यापक मरम्मत कार्य की आवश्यकता है। जब तक ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए एक संपत्ति के बजाय एक दायित्व बना रहेगा।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सफर हुआ खतरनाक, खस्ताहाल सड़क से यात्रियों में आक्रोश

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