लखनऊ में 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित एक भव्य आयोजन में, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने अपनी देशभक्ति की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन शहर के एक प्रमुख स्थल पर आयोजित किया गया था, जहाँ बड़ी संख्या में नागरिक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आईटीबीपी के जवानों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति के गीतों की श्रृंखला थी, जिसने उपस्थित दर्शकों के भीतर देशभक्ति की भावना को जागृत कर दिया। आयोजन की शुरुआत आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद 'वंदे मातरम' गीत का सामूहिक गायन किया गया। यह गीत न केवल एक संगीत प्रस्तुति थी, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक भी था। जैसे ही जवानों ने 'वंदे मातरम' की धुन पर प्रस्तुति दी, पूरे आयोजन स्थल पर देशभक्ति की लहर दौड़ गई। दर्शकों ने खड़े होकर जवानों का अभिवादन किया और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण गुंजायमान हो गया। कार्यक्रम के दौरान, आईटीबीपी के एक जवान ने अपनी सुरीली आवाज में 'तेरी मिट्टी में मिल जावा, गुल बनके मैं खिल जावा' गीत प्रस्तुत किया। यह गीत न केवल अपनी मधुरता के लिए, बल्कि अपने गहरे अर्थ के लिए भी विशेष रूप से सराहा गया। इस गीत में मातृभूमि के प्रति समर्पण और उसके लिए प्राण न्यौछावर करने की भावना को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया गया था। दर्शकों की आँखों में इस गीत के दौरान आँसू देखे गए, क्योंकि यह गीत देश के लिए बलिदान की भावना को स्पर्श कर गया। आयोजन के दौरान आईटीबीपी के जवानों ने विभिन्न देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी, जिसमें उनकी वर्दी और अनुशासन ने दर्शकों को प्रभावित किया। इन गीतों के माध्यम से जवानों ने अपनी कठिन ड्यूटी और देश की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया। यह आयोजन न केवल 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न था, बल्कि देश के सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक अवसर भी था। आयोजन में उपस्थित स्थानीय नागरिकों ने आईटीबीपी के जवानों के प्रदर्शन की सराहना की। कई लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में देशभक्ति की भावना विकसित होती है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि जवानों के गीत सुनकर उन्हें अपने बचपन के दिन याद आ गए, जब वे स्कूल में 'वंदे मातरम' गाते थे। यह आयोजन लोगों के बीच एकता और राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने में सफल रहा। आयोजन के समापन पर आईटीबीपी के अधिकारियों ने उपस्थित लोगों को धन्यवाद दिया और 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी हमेशा देश की सीमाओं की रक्षा करने और देश के लोगों के साथ जुड़े रहने के लिए प्रतिबद्ध है। यह आयोजन लखनऊ में एक सफल और प्रेरणादायक आयोजन सिद्ध हुआ, जिसने 'वंदे मातरम' की विरासत को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लखनऊ में आईटीबीपी जवानों के गीत पर झूमे लोग: 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने का जश्न
Share this story