लखनऊ में हरियाली तीज के अवसर पर शहर में एक ओर जहाँ हरियाली और उमंग का रंग छाया रहा, वहीं दूसरी ओर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में 'टीज क्वीन' का ताज एक युवती पूरवी के सिर सजा, जिसने अपनी गरिमा और शालीनता से सभी का मन मोह लिया। यह आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि लखनऊ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुआ। हरियाली तीज का महत्व इस पर्व के नाम में ही निहित है। यह त्योहार मानसून के आगमन और प्रकृति की हरियाली के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। हिंदू परंपरा में इसका विशेष धार्मिक महत्व है, जहाँ सुहागिन महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए देवी पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। यह पर्व प्रेम, समर्पण और वैवाहिक बंधन की पवित्रता का प्रतीक है, जो लखनऊ जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर में और भी अधिक गरिमा के साथ मनाया जाता है। लखनऊ, जिसे 'नवाबों के शहर' के रूप में जाना जाता है, की अपनी एक विशिष्ट पहचान है जो यहाँ के त्योहारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यहाँ की तहजीब और नफासत हर आयोजन में परिलक्षित होती है। हरियाली तीज के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भी यही झलक दिखाई दी, जहाँ पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक उत्साह का सुंदर संगम देखने को मिला। यह आयोजन लखनऊ की उस जीवंत संस्कृति का प्रमाण है, जहाँ हर त्योहार को बड़ी ही श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जाता है। आयोजन स्थल पर वातावरण पूरी तरह से उत्सव के रंग में रंगा हुआ था। आम के पत्तों और फूलों से की गई सजावट ने पूरे स्थान को एक दिव्य स्वरूप प्रदान किया था। पारंपरिक झूलों की स्थापना ने इस आयोजन की विशेषता को और बढ़ा दिया, जो हरियाली तीज का एक अनिवार्य हिस्सा होते हैं। महिलाएँ पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर आई थीं, जिनमें मुख्य रूप से हरे रंग के परिधानों का बोलबाला था। लोक संगीत और पारंपरिक गीतों ने इस आयोजन में चार चाँद लगा दिए, जिससे उपस्थित लोग झूम उठे और इस पर्व की मूल भावना से जुड़ गए। 'टीज क्वीन' का चयन इस उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण था। यह सम्मान केवल एक प्रतियोगिता का परिणाम नहीं था, बल्कि उस युवती की पहचान थी जो इस पर्व की मूल भावना—अनुग्रह, सुंदरता और सुहाग के प्रतीक—को आत्मसात करती है। पूरवी का चयन इस बात को दर्शाता है कि वह इस पर्व के मूल्यों और परंपराओं की सच्ची प्रतिनिधि हैं। 'टीज क्वीन' का ताज पहनाना एक ऐसी परंपरा है जो युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करती है, और पूरवी का यह सम्मान लखनऊ की उस युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा जो अपनी जड़ों को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। निष्कर्षतः, लखनऊ में हरियाली तीज का यह आयोजन एक बड़ी सफलता रहा। इसने न केवल शहर की सांस्कृतिक जीवंतता को प्रदर्शित किया, बल्कि सामाजिक एकजुटता को भी मजबूत किया। ऐसे आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे लोगों को एक साथ लाते हैं, सामुदायिक संबंधों को प्रगाढ़ करते हैं और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम बनते हैं। पूरवी का 'टीज क्वीन' के रूप में सम्मानित होना इस बात का प्रतीक है कि लखनऊ में परंपराएँ केवल जीवित नहीं हैं, बल्कि वे फल-फूल रही हैं और नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय हो रही हैं। यह आयोजन लखनऊ की पहचान का एक गौरवशाली अध्याय है।
लखनऊ में हरियाली तीज का उत्सव, पूरवी को 'टीज क्वीन' का ताज
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