लखनऊ: 65 वर्षीय अशोक बहार ने एम बी ए-एल एल बी डिग्री होने के बावजूद NEET परीक्षा दी। यह घटना तब सामने आई जब बहार ने अपनी शैक्षणिक योग्यता के बावजूद नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्री टेस्ट (NEET) देने के लिए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक केंद्र पर पहुंचे। बहार ने वर्ष 2005 में प्रबंधन में एम बी ए और 2008 में कानून में एल एल बी की डिग्री प्राप्त की थी, फिर भी उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के लिए इस राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बैठने का निर्णय लिया।
NEET भारत में मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश के लिए एक अनिवार्य परीक्षा है। बहार की इस कदम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, विशेष रूप से तब जब उन्होंने अपनी पिछली डिग्री के आधार पर आयु सीमा या अन्य छूट का लाभ नहीं लिया। उनकी इस पहल पर स्थानीय शिक्षाविदों और चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय है।
कुछ लोगों का तर्क है कि यह समर्पण का उदाहरण है, जबकि अन्य का मानना है कि यह संसाधनों का अनुचित उपयोग है, विशेषकर तब जब उन्होंने पहले ही दो पेशेवर डिग्रियां प्राप्त कर ली हैं। यह घटना उत्तर प्रदेश में शिक्षा नीति और प्रवेश प्रक्रियाओं की जांच का विषय बन गई है।