Article Image

लखनऊ। संस्कृति निदेशालय, उत्तर प्रदेश लखनऊ के सहयोग से इप्टा कैसरबाग में 27 सितंबर को बलराज साहनी सभागार में नाटक ‘दो बेचारे’ का मंचन किया गया। सुरेन्द्र शाह द्वारा लिखित इस हास्य-व्यंग्य नाटक का निर्देशन एवं परिकल्पना शक्ति मिश्रा ने की। कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी विजय वास्तु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

नाटक की कहानी सोम और प्रकाश नामक दो मित्रों के इर्द-गिर्द घूमती है। सोम सीधा-सादा और नौकरीपेशा व्यक्ति है, जबकि उसका मित्र प्रकाश व्यवहारकुशल और चतुर है। महंगाई के दौर में घरेलू खर्च और तनख्वाह को लेकर दोनों के बीच होने वाली बातचीत हास्य की स्थिति पैदा करती है।

कहानी में प्रकाश अपने मित्र सोम को सलाह देता है कि वह अपनी पत्नी के हाथ का खाना खाने के बहाने उसके घर जाए और पत्नी के बनाए भोजन की तारीफ कर सोम का घरेलू तनाव कम करे। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से हास्यपूर्ण मोड़ लेता है। प्रकाश सोम की परेशानी दूर करने के लिए दो घंटे के लिए एक महिला को उसकी पत्नी का किरदार निभाने के लिए तैयार कर लेता है।

नाटक के दौरान परिस्थितियां उस समय और अधिक रोचक हो जाती हैं, जब सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में आई महिला को सोम की पत्नी समझ लिया जाता है। घरेलू रिश्तों, पति-पत्नी की नोकझोंक, महंगाई और सामाजिक दिखावे पर व्यंग्य करते हुए नाटक दर्शकों को लगातार गुदगुदाता है।

मंचन के माध्यम से यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि छोटी-छोटी घरेलू परेशानियां और आपसी गलतफहमियां किस तरह रिश्तों में तनाव पैदा कर सकती हैं। हास्य के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों को प्रस्तुत करने के प्रयास को दर्शकों ने सराहा।

नाटक के लेखक सुरेन्द्र शाह तथा निर्देशक/रंगकर्मी शक्ति मिश्रा की प्रस्तुति ने मनोरंजन के साथ सामाजिक सरोकार को भी मंच पर प्रभावी ढंग से सामने रखा। रिपोर्ट.. अनुज तिवारी