लखनऊ: लखनऊ नगर निगम (LMC) ने आज एक बड़ा निर्णय लेते हुए अपने प्रस्तावित रोड-चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को रोक दिया है। यह कदम प्राथमिक विद्यालयों के प्रबंधन और अभिभावकों के संघों द्वारा कड़े विरोध के बाद उठाया गया है, जो इस योजना को छात्रों की पढ़ाई और सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे थे।
यह विवाद गोमती नगर और आलमबाग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में शुरू हुआ, जहाँ LMC ने शहरी विकास के तहत कई सड़कों को चौड़ा करने का प्रस्ताव रखा था। इस योजना के तहत कई प्राथमिक विद्यालयों के पास की ज़मीन को अधिग्रहण करने की बात कही गई थी, जिससे स्कूल की मुख्य सड़क तक पहुँच बाधित हो सकती थी। इसके विरोध में LESA ने नगर आयुक्त को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें तर्क दिया गया कि यह प्रोजेक्ट अनावश्यक है और इससे सैकड़ों छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित होगी। संघ ने इस योजना को "अनावश्यक व्यवधान" पैदा करने वाला बताया और मांग की कि स्कूल की पहुंच से समझौता न किया जाए।
विरोध प्रदर्शन तेजी से बढ़ने लगे। अभिभावक-शिक्षक संघों ने स्कूल परिसर के बाहर प्रदर्शन किया और इस मुद्दे को स्थानीय नगर पार्षद और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने उठाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास कार्य शिक्षा की कीमत पर नहीं हो सकते। इस सार्वजनिक विरोध और स्थानीय प्रतिनिधियों के बढ़ते दबाव के बाद, LMC प्रशासन ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित प्रोजेक्ट की समय-सीमा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया जाए। नगर आयुक्त ने कहा कि प्रोजेक्ट के पुनर्मूल्यांकन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी। साथ ही, एक लिखित आश्वासन भी जारी किया गया कि किसी भी प्राथमिक विद्यालय को उसकी मुख्य सड़क से नहीं काटा जाएगा, और यदि सड़क चौड़ीकरण आवश्यक समझा गया, तो छात्रों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। LESA ने इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि यह जनता के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह घटना लखनऊ में विकास कार्यों और सार्वजनिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करती है।