कानपुर। महिला महाविद्यालय के सभागार में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो प्रतिभा श्रीवास्तव, मुख्य अतिथि प्रो मनोज दीक्षित पूर्व कुलपति, महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, राजस्थान विशिष्ट अतिथि प्रो विनय कुमार पाठक कुलपति, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर, विशिष्ट अतिथि श्रीमती मेघना श्रीवास्तव सचिव, प्रबंध तंत्र, महिला महाविद्यालय, प्रमुख वक्ता प्रो प्रदीप मिश्रा मुख्य वक्ता प्रोफेसर ओपी शुक्ला प्रो एके सिंह विवेक द्विवेदी द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। तत्पश्चात संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो दीपाली श्रीवास्तव, डॉ सुमन लता, डॉ गुंजन चौधरी एवं श्री मनोज कुमार के निर्देशन में छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। प्राचार्या प्रो प्रतिभा श्रीवास्तव ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में उच्च शिक्षा को केवल उपाधि देने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि इसे छात्रों में व्यावहारिक कौशल और रोजगार क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम बनना होगा। मुख्य अतिथि प्रो मनोज दीक्षित ने कहा कि नई शिक्षा नीति और बदलते नीतिगत माहौल ने हमारे सामने नए दृष्टिकोण और नए मार्ग खोले हैं, जो रटने की बजाय रचनात्मकता, नए विचार और शोध को बढ़ावा देते हैं। प्रो विनय कुमार पाठक ने कहा कि आज हमारे सामने तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बिठाने और पाठ्यक्रम को उद्योगों की जरूरत के अनुसार ढालने जैसी मुख्य चुनौतियां हैं, जिसका हमें मिलकर समाधान खोजना होगा। श्रीमती मेघना श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा में नए प्रयोग एवं शोध को बढ़ावा देकर ही हम वैश्विक मंच पर ज्ञान और विश्वगुरु के रूप में उभर सकते हैं। कार्यक्रम संयोजिका प्रो मनीषा शुक्ला द्वारा दी गई। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी में होने वाला विचार मंथन उच्च शिक्षा के बदलाव के लिए व्यावहारिक नीतियों और समाधान प्रस्तुत करने में सफल होगा।मुख्य वक्ता प्रो प्रदीप मिश्रा ने कहा कि रोजगार की क्षमता बढ़ाने के लिए महाविद्यालय और उद्योगों के बीच सक्रिय जुड़ाव को और अधिक मजबूत करना होगा। प्रो ओपी शुक्ला ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते दौर के अनुसार खुद को ढालना और लगातार सीखते रहना ही सफलता की असली कुंजी है।प्रो एके सिंह ने कहा कि शिक्षा में बदलाव के लिए शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण और बदलते समय के साथ आगे बढ़ना भी बेहद जरूरी है।प्रो विवेक द्विवेदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से रटने की प्रणाली को छोड़कर शोध और नए प्रयोगों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देने की आवश्यकता है। संगोष्ठी के शोध पत्रों से बनी पुस्तक और डॉ नम्रता पांडे द्वारा लिखित दो पुस्तकों का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो रश्मि गोरे ने की। उन्होंने कहा कि उद्यमिता और नए व्यवसाय शुरू करने की संस्कृति को बढ़ावा देना आज के समय की बड़ी मांग है, ताकि युवा नौकरी मांगने वाला नहीं बल्कि देने वाला बने। द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ सुदर्शन सिंह ने की। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रांति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस दौर में हमें अपनी पढ़ाने की पद्धतियों को आधुनिक एवं तकनीक के अनुकूल बनाना ही होगा। इस सत्र में शोधार्थियों द्वारा कुल चालीस शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। मंच संचालन प्रो ज्योति किरण एवं द्वितीय तकनीकी सत्र का मंच संचालन डॉ अनीता वर्मा द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर ममता दीक्षित द्वारा किया गया।