कानपुर पुलिस ने मुखबिरी और ड्रोन निगरानी के समन्वय से एक बड़ी सफलता हासिल की है, जिसमें 12 व्यक्तियों को साइबर धोखाधड़ी में संलिप्त होने के कारण गिरफ्तार किया गया है। यह अभियान, जो 13 दिनों तक चला, पारंपरिक मानवीय खुफिया जानकारी और आधुनिक तकनीकी सहायता के प्रभावी उपयोग का एक प्रमुख उदाहरण है। इस पूरी प्रक्रिया में मुखबिरी के माध्यम से प्राप्त महत्वपूर्ण जानकारी के आधार पर तीन दिनों तक ड्रोन से निगरानी की गई, जिसके बाद संदिग्धों को दबोच लिया गया। यह अभियान शहर में साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक कदम है। इस अभियान का आधार स्तंभ 10 दिनों तक की गई निरंतर मानवीय खुफिया जानकारी (मुखबिरी) थी। पुलिस ने मुखबिरों के नेटवर्क और तकनीकी स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर संदिग्धों की गतिविधियों, उनके संभावित ठिकानों और उनके कार्य करने के तरीकों की विस्तृत जानकारी जुटाई। इस पारंपरिक पुलिसिंग पद्धति ने अधिकारियों को साइबर अपराधियों के नेटवर्क की पहचान करने, उनके वित्तीय लेन-देन का पता लगाने और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद की। इस प्रारंभिक चरण में प्राप्त जानकारी ने ड्रोन निगरानी के आगामी चरणों के लिए एक ठोस आधार प्रदान किया। मुखबिरी के बाद, पुलिस ने संदिग्धों की गतिविधियों की निगरानी के लिए तीन दिनों तक रणनीतिक रूप से ड्रोन का उपयोग किया। इस तकनीकी हस्तक्षेप ने पुलिस को संदिग्धों के वाहनों और उनके संभावित ठिकानों पर बिना किसी संदेह के नजर रखने की अनुमति दी। ड्रोन से प्राप्त हवाई दृश्यों ने पुलिस को संदिग्धों के पलायन के रास्तों की पहचान करने और उनकी गतिविधियों पर वास्तविक समय (रियल-टाइम) में नजर रखने में मदद की। यह तकनीक विशेष रूप से तब उपयोगी साबित हुई जब संदिग्धों ने पुलिस की उपस्थिति का आभास होने पर अपनी योजनाओं को बदलने या भागने की कोशिश की। पुलिस ने पुष्टि की है कि पकड़े गए 12 व्यक्ति सक्रिय साइबर अपराधी थे, जो विभिन्न ऑनलाइन धोखाधड़ी और वित्तीय ठगी के मामलों में संलिप्त थे। जांच के दौरान, यह पाया गया कि वे सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करके भोले-भाले लोगों को निशाना बना रहे थे। पकड़े गए व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है और उनकी डिजिटल गतिविधियों की गहराई से जांच की जा रही है ताकि उनके नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके द्वारा संचालित ठगी के बड़े मामलों का पता लगाया जा सके। कानपुर में इस सफल अभियान ने पारंपरिक पुलिसिंग और आधुनिक तकनीक के समन्वय को प्रदर्शित किया है। मुखबिरी और ड्रोन निगरानी के संयुक्त दृष्टिकोण ने न केवल अपराधियों को पकड़ा, बल्कि शहर में साइबर अपराधों के विरुद्ध एक मजबूत संदेश भी दिया है। पुलिस का कहना है कि इस तरह के अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए और अधिक संसाधनों और तकनीकी उपकरणों की आवश्यकता है। पकड़े गए साइबर अपराधियों को कानूनी कार्रवाई के लिए पेश किया जाएगा और जांच के दौरान उनके द्वारा किए गए अपराधों की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी।