कानपुर: जल जीवन मिशन के प्रभाव मूल्यांकन में मिली गंभीर खामियों के कारण राज्य सरकार ने गहन जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला जल आपूर्ति योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है।
नगर निगम के जल विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई जांच में पाया गया कि पिछले तीन वर्षों में 150 करोड़ रुपये की योजना के तहत किए गए कार्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 40% से अधिक कार्यों को अधूरा या मानकों के अनुरूप नहीं बताया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस लापरवाही से जनता के धन की बर्बादी हुई है और योजना के लाभों में देरी हुई है। जल जीवन मिशन का उद्देश्य 2024 तक प्रत्येक घर को नल से पानी उपलब्ध कराना है, लेकिन मूल्यांकन में मिली खामियों के कारण योजना की प्रगति प्रभावित हुई है।
नगर आयुक्त ने जांच रिपोर्ट पर कहा कि "हम इस लापरवाही की पूरी जांच करेंगे और जो भी दोषी अधिकारी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।"
यह मामला राज्य सरकार के लिए एक सबक है कि विकास योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता कितनी जरूरी है। जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए समय-समय पर स्वतंत्र मूल्यांकन होना चाहिए ताकि जनता के धन का उचित उपयोग सुनिश्चित हो सके।