कानपुर पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 15 साल से फरार चल रहे एक पिता और पुत्र की जोड़ी को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला तब सामने आया जब पुलिस की विशेष टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर इन दोनों आरोपियों को उत्तर प्रदेश के बाहर मध्य प्रदेश स्थित उज्जैन से धर दबोचा। पिछले एक दशक और पांच वर्षों से अधिक समय तक ये आरोपी कानून की नजरों से बचते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान पर अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे। पुलिस के अनुसार, इन दोनों का मुख्य उद्देश्य केवल और केवल पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पकड़ से दूर रहना था, जिसके लिए उन्होंने अपना पुश्तैनी घर तक बेच दिया था और अपना स्थायी ठिकाना बदल लिया था। इस घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ कानून व्यवस्था को लेकर कई अहम सवाल भी खड़े कर दिए हैं कि आखिर इतने लंबे समय तक ये व्यक्ति पुलिस की रडार से कैसे बचते रहे। गिरफ्तार किए गए इस पिता-पुत्र की जोड़ी का संबंध मूल रूप से कानपुर शहर से है। वर्ष 2009 के आसपास इन दोनों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद से ही ये पुलिस की गिरफ्त में आना चाहते थे। उस समय से लेकर अब तक इन आरोपियों ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए तमाम तरह की तरकीबें अपनाईं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जब इन्हें लगा कि कानपुर में उनके छिपे रहने की जगहें सुरक्षित नहीं हैं और पुलिस की जांच तेज हो रही है, तो उन्होंने अपना घर बेचने का फैसला किया। इस कदम के पीछे उनका तर्क यह था कि संपत्ति बेचकर मिलने वाले धन से वे किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर जाकर नई जिंदगी शुरू कर सकेंगे। घर की बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग उन्होंने अपना जीवनयापन करने और पुलिस की नजरों से पूरी तरह ओझल रहने के लिए किया। इस पूरी प्रक्रिया में उन्होंने अपने परिवार और स्थानीय समुदाय से भी दूरी बना ली थी, ताकि कोई भी व्यक्ति उनकी पहचान उजागर न कर सके। घर बेचने के पश्चात यह पिता-पुत्र की जोड़ी कानपुर छोड़कर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में जा बसी। उज्जैन में उन्होंने अपनी पहचान पूरी तरह से बदल ली थी और वहां के स्थानीय निवासियों के बीच एक सामान्य नागरिक की तरह व्यवहार करने लगे थे। पिछले 15 वर्षों के दौरान उन्होंने वहां कोई भी ऐसा काम नहीं किया जिससे उन पर कोई शक पैदा हो सके। उन्होंने वहां मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा किया और किसी भी प्रकार के सामाजिक या पारिवारिक संपर्क से खुद को पूरी तरह अलग रखा। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि उन्होंने उज्जैन में रहने के दौरान अपना मूल नाम और पृष्ठभूमि किसी को नहीं बताई थी। उन्होंने वहां एक किराए के मकान में निवास किया और समय के साथ स्थानीय लोगों के बीच घुलने-मिलने का प्रयास किया। हालांकि, उनकी यह गुमनामी तब समाप्त हो गई जब कानपुर पुलिस को उनके वर्तमान ठिकाने के बारे में पुख्ता जानकारी मिल गई। पुलिस की एक विशेष टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उज्जैन पहुंचकर उन्हें उनके नए ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। कानपुर पुलिस की इस सफल कार्रवाई को कानून व्यवस्था के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। पिछले 15 वर्षों से फरार आरोपियों का पकड़ में आना पुलिस की लंबी और थकाऊ जांच का परिणाम है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिरों की सूचना और पुराने रिकॉर्ड की गहन छानबीन का सहारा लिया गया। पुलिस टीम ने लगातार कई महीनों तक निगरानी रखी और विभिन्न संभावित ठिकानों पर अपनी नजर बनाए रखी। जब यह स्पष्ट हो गया कि दोनों आरोपी उज्जैन में छिपे हुए हैं, तो एक सुनियोजित योजना के तहत उन्हें गिरफ्तार करने की रूपरेखा तैयार की गई। पुलिस ने बिना किसी हंगामे के उन्हें हिरासत में लिया और उसके बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए उन्हें वापस कानपुर लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस पूरी कार्रवाई में स्थानीय पुलिस प्रशासन का भी पूरा सहयोग रहा, जिसने आरोपियों को पकड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कानपुर वापस लाए जाने के बाद अब इन दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा, जहां उन्हें उनके द्वारा किए गए पुराने अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इन दोनों के खिलाफ दर्ज मामले बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। इन मामलों में धोखाधड़ी, विश्वासघात और अन्य संज्ञेय अपराध शामिल हैं, जिनकी जांच 15 साल पहले शुरू हुई थी। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन 15 वर्षों के दौरान इन आरोपियों ने उज्जैन में किस प्रकार का जीवन व्यतीत किया और क्या उन्होंने वहां रहते हुए किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में भी संलिप्तता निभाई। इसके अलावा, पुलिस उन सभी व्यक्तियों की भी पहचान कर रही है जिन्होंने इन फरार आरोपियों को आश्रय प्रदान किया हो या उनकी मदद की हो। पुलिस का मानना है कि फरार आरोपियों को पनाह देने वाले लोगों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके। इस घटना ने कानपुर शहर के निवासियों और स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच एक बार फिर से जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित किया है। 15 वर्षों तक फरार रहने वाले आरोपियों का इस तरह से पकड़े जाना इस बात का प्रमाण है कि पुलिस की लंबी जांच और निगरानी तंत्र अंततः अपना परिणाम दे ही देता है। हालांकि, यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि फरार आरोपी किस तरह से अपनी पहचान बदलकर और अपना घर बेचकर पुलिस की पकड़ से बच सकते हैं। पुलिस विभाग अब ऐसे फरार आरोपियों की पहचान करने और उन्हें ट्रैक करने के लिए अपनी कार्यप्रणाली में और अधिक सुधार करने पर विचार कर रहा है। इस गिरफ्तारी के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सकेगी। फिलहाल, कानपुर पुलिस इस पूरी मामले की गहनता से जांच कर रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि न्याय की प्रक्रिया में कोई भी चूक न हो।
कानपुर में 15 वर्षों बाद पिता-पुत्र की जोड़ी गिरफ्तार, पुलिस से बचने हेतु घर बेचकर उज्जैन में कर रहे थे जीवनयापन

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