बारिश के बाद शहर की बदहाल सड़कों को लेकर महापौर-नगर आयुक्त ने अधिकारियों के साथ की बैठक, छह जोनों में सैकड़ों सड़कें क्षतिग्रस्त—पैचवर्क के लिए करोड़ों रुपये के टेंडर
कानपुर। बारिश के बाद शहर की सड़कों पर जगह-जगह बने गड्ढे लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। लंबे समय से सड़कों की बदहाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सोमवार को नगर निगम मुख्यालय में आखिरकार क्षतिग्रस्त सड़कों को गड्ढामुक्त करने और पैचवर्क कराने को लेकर अधिकारियों की बैठक हुई। मोतीझील स्थित समिति कक्ष में महापौर प्रमिला पाण्डेय और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की संयुक्त अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी छह जोनों की सड़कों की स्थिति, टेंडर और मरम्मत कार्य की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि शहर के अलग-अलग जोनों में बड़ी संख्या में सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। अधिकारियों को जोनवार क्षतिग्रस्त सड़कों की सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
छह जोनों में सामने आई सड़कों की बदहाली
जोन-1 में 18 सड़कें क्षतिग्रस्त बताई गई हैं। इनका कच्चा पैचवर्क कराया जा चुका है, जबकि पक्के पैचवर्क के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस कार्य पर करीब 1.08 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
जोन-2 की स्थिति सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई। यहां 131 सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। इनमें 32 सड़कों का टेंडर हो चुका है, जबकि शेष के लिए अलग-अलग तिथियों में टेंडर प्रक्रिया जारी होनी है। इन सड़कों को गड्ढामुक्त करने की अनुमानित लागत करीब 16.42 करोड़ रुपये बताई गई।
जोन-3 में 40 सड़कें क्षतिग्रस्त हैं और सभी के टेंडर हो चुके हैं। पैचवर्क पर करीब 3.72 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
जोन-4 में 21 सड़कें क्षतिग्रस्त मिली हैं। सभी के टेंडर हो चुके हैं और इनमें सात सड़कों का काम पूरा भी हो चुका है। यहां पैचवर्क की लागत करीब 2.77 करोड़ रुपये है।
जोन-5 में 43 सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। बारिश के बाद 18 वार्डों में प्रति वार्ड एक लाख रुपये की पत्रावली तैयार कर कच्चा पैचवर्क कराया गया। पक्के पैचवर्क के लिए टेंडर जारी हो चुका है और 31 सड़कों के वर्क ऑर्डर भी जारी किए जा चुके हैं। कार्य की लागत करीब 7.07 करोड़ रुपये बताई गई।
जोन-6 में 37 सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। इनमें 21 सड़कों का टेंडर हो चुका है। सभी सड़कों के कार्य की कुल लागत करीब 3.26 करोड़ रुपये है।
टेंडर से लेकर सीएम ग्रिड तक हुई समीक्षा
बैठक में महापौर ने बिलो टेंडर के संबंध में भी अधिकारियों से जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश टेंडर करीब 15 प्रतिशत तक बिलो हैं, जबकि कुछ सड़कें 15 प्रतिशत से अधिक बिलो पर हैं।
इसके अलावा सीएम ग्रिड योजना की सड़कों पर चल रहे कार्यों की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में पांच सड़कों पर काम चल रहा है, जिसकी कुल लागत करीब 185.66 करोड़ रुपये है। योजना के प्रथम चरण में शासन से 46 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। द्वितीय चरण में अलग-अलग सड़कों के बजट और कार्य की प्रगति के अनुसार शासन से धनराशि जारी की जा रही है।
सीवर और वाटर लाइन शिफ्टिंग के लिए प्रथम चरण में प्रावधान नहीं होने के कारण 34 करोड़ रुपये 15वें वित्त आयोग की धनराशि से दिए जाने की जानकारी भी बैठक में दी गई।
अब बारिश बीत गई, तो काम में तेजी के निर्देश
बैठक में महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अब बारिश का मौसम बीत चुका है, इसलिए क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का काम जल्द से जल्द पूरा कराया जाए। साथ ही सीएम ग्रिड के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि बैठक में सामने आए इन आंकड़ों और करोड़ों रुपये की योजनाओं का असर शहर की सड़कों पर कितनी जल्दी दिखाई देता है। फिलहाल शहरवासियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि लंबे समय से गड्ढों और बदहाल सड़कों से जूझ रहे लोगों को पक्की राहत आखिर कब मिलेगी।